बिलासपुर नगर निगम में अब सवाल सिर्फ 120 square feet के एक छोटे से ऑफिस आबंटन का नहीं है…. सवाल है क्या नगर निगम की MIC (mayor–in–council) के फैसले के बाद भी निगम आयुक्त किसी प्रस्ताव को अपनी मेज़ पर रोक सकते हैं ?
बिलासपुर में छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ ने अपने संगठन की दैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए राघवेंद्र राव सभा भवन में महज 120 square feet के एक ऑफिस की मांग की थी। बताया जा रहा है कि बातचीत के बाद नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने MIC में प्रस्ताव पारित कर विधिवत ऑफिस के आबंटन का आश्वासन भी दिया , MIC में प्रस्ताव पारित भी हो गया। लेकिन इसके बाद विरोध शुरू हुआ…
अभी हाल ही में यह बात सामने आई है कि प्रेस क्लब के अध्यक्ष ने ऑफिस आबंटन को लेकर नगर निगम के समक्ष आपत्ति दर्ज़ की है । इसके बाद से ही आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे का कोई सकारात्मक जवाब पत्रकार महासंघ को नहीं मिल रहा है।
अब असली सवाल यहीं से शुरू होता है…
नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने मामला MIC के संज्ञान में लाया , मामले को MIC के सामने रखा गया , MIC ने प्रस्ताव पारित भी कर दिया , लेकिन प्रस्ताव पारित हुए भी करीब 15 दिन गुज़र गए और पत्रकार महासंघ को अब तक ऑफिस का आबंटन नहीं किया गया है।
तो सवाल सीधा है…
* जब MIC ने प्रस्ताव को मुहर लगा दी , तो फिर फाइल किस टेबल पर अटकी है ?
* क्या कोई वैधानिक स्वीकृति बाकी है ?
* क्या संपत्ति के हस्तांतरण के नियमों के तहत कोई प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है ?
* या फिर किसी आपत्ति के दबाव में टालमटोल की जा रही है ?
छत्तीसगढ़ नगर पालिक अधिनियम में नगर निगम की अचल संपत्ति के हस्तांतरण और लीज (lease) के लिए स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था है। धारा 80 और अचल संपत्ति अंतरण नियम , 1994 इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। इसलिए अगर कोई कानूनी प्रक्रिया बाकी है , तो निगम प्रशासन को उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।
लेकिन यदि सारी वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और MIC का प्रस्ताव प्रभावी रूप से पारित हो चुका है , तो फिर उस प्रस्ताव को लागू करने में देरी क्यों ?
और सबसे बड़ा सवाल….
क्या आयुक्त यह तय कर सकते हैं कि MIC के फैसले को कब लागू करना है और कब नहीं ?
नगर निगम अधिनियम में आयुक्त निगम का प्रमुख अधिकारी जरूर है , लेकिन नगर निगम का शासन केवल आयुक्त की व्यक्तिगत इच्छा से नहीं चलता। अधिनियम निगम , महापौर , MIC और आयुक्त , सभी की भूमिकाएं निर्धारित करता है। और MIC कोई औपचारिक संस्था नहीं है।
ऐसे में पत्रकार महासंघ का सवाल वाजिब है…
* अगर MIC ने प्रस्ताव पारित किया है तो उसकी अगली कार्यवाही क्या है ?
* फाइल कहां रुकी है ?
* किसकी आपत्ति है ?
* कौन सी कानूनी स्वीकृति बाकी है ?
और अगर कोई स्वीकृति बाकी नहीं है तो फिर ऑफिस की चाबी अब तक क्यों नहीं दी गई ?
प्रेस क्लब के सचिव संदीप करिहार का पत्रकार महासंघ को खुला समर्थन….
पत्रकार महासंघ के अनुसार बिलासपुर प्रेस क्लब सचिव संदीप करिहार ने निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे से स्पष्ट रूप से कहा है कि ऑफिस आबंटन नहीं किए जाने को लेकर जो आपत्ति पत्र सामने आया है , उसमें सचिव के हस्ताक्षर नहीं है और वह विधिवत रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में पत्र की वैधता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।
पत्रकार महासंघ अब आंदोलन की तैयारी में…
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि पत्रकार संगठन अब आंदोलन और धरने की चेतावनी दे रहा है। यह तस्वीर निश्चित रूप से चिंताजनक है। इन परिस्थितियों को निगम प्रशासन आने वाले समय में कैसे सुलझाता है, इस पर सबकी नज़र रहेगी। क्योंकि पत्रकार जनता के मुद्दे उठाने के लिए सड़क पर उतरता है।
लेकिन अगर वही पत्रकार अपने संगठन के एक छोटे से कार्यालय के लिए नगर निगम के सामने धरने पर बैठने के लिए मजबूर हो जाए , तो इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल तो उठेंगे ही। इस संवेदनशील मामले में महापौर पूजा विधानी को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए पत्रकार महासंघ से चर्चा करके विधिसम्मत निर्णय लेना चाहिए।
और अगर पत्रकार महासंघ आंदोलन करता है , तो क्या नगर निगम इस विवाद को बातचीत से सुलझाएगा या फिर एक छोटे से कार्यालय का मामला अब शहर की बड़ी प्रशासनिक लड़ाई बनेगा ?
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