CAG का पूरा नाम है comptroller and auditor general of india। हिंदी में इसे भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक कहते हैं। CAG भारत की Supreme Audit Institution यानी सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था है। यह न तो किसी मंत्रालय के अधीन सामान्य सरकारी विभाग है और न ही संसद का कोई विभाग। संविधान ने इसे एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था का दर्ज़ा दिया है।
भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन कहा जाता है। लेकिन अब संसद में पेश हुई CAG की रिपोर्ट ने रेलवे की यात्री सुविधाओं को लेकर एक ऐसा आइना दिखाया है , जिससे रेलवे मंत्रालय की साख पर सवाल उठने लगे हैं। इस रिपोर्ट के बाद रेलवे बोर्ड , जोनल रेलवे और मंडल स्तर के बड़े अधिकारियों की काबिलियत पर भी सवाल किए जा रहे हैं।
CAG की रिपोर्ट no. 31 of 2026 में 512 गैर–उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का विस्तृत ऑडिट किया गया है।
512 में से 458 स्टेशन यानी 89% से ज्यादा स्टेशन ऐसे पाए गए जहां minimum essential amenities में भारी कमी पाई गई।
मतलब साफ है , जिस सुविधाओं को रेलवे ने खुद न्यूनतम और अनिवार्य माना है , वही सुविधा देश के सैकड़ों स्टेशनों पर या तो उपलब्ध नहीं थी या निर्धारित मानक से बहुत कम थी।
CAG ने रेलवे स्टेशन में पानी , प्रतीक्षालय , बैठने की व्यवस्था , प्लेटफॉर्म शेल्टर , यूरीनल , शौचालय , पंखे , वॉटर कूलर , फुट ओवरब्रिज , डस्टबिन और सार्वजनिक उद्घोषणा ( public address system) जैसी सुविधाओं में कमियां दर्ज़ की हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश दिए थे कि minimum essential amenities सभी स्टेशनों पर सुनिश्चित की जाए। लेकिन आज तक इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। CAG के ऑडिट में वर्षों बाद भी सुविधाओं में भारी कमी सामने आ गई।
और अब आता है सबसे बड़ा सवाल–जवाबदार कौन ?
अगर किसी रेलवे स्टेशन पर पानी की व्यवस्था बेहद ख़राब है , तो सबसे पहले सवाल स्थानीय स्टेशन प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूछा जाएगा। अगर शौचालय , प्लेटफार्म , शेड , नल , बैठने की व्यवस्था या दूसरी यात्री सुविधाएं निर्धारित मानक से कम हैं , तो मामला केवल स्टेशन मास्टर तक सीमित नहीं रहता। स्टेशन की सुविधा जिस विभाग के अधिकार क्षेत्र में है , वहां के SSE/JE , AEN , DEN , commercial department , station administration और संबंधित divisional officers की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
इसके ऊपर DRM यानी Divisional Railway Manager की जवाबदेही आती है , क्योंकि मंडल स्तर पर अलग–अलग विभागों के काम , maintenance , passenger amenities और sanctioned works की monitoring होती है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
अगर मंडल (division) स्तर पर लगातार कमी बने रहे , तो सवाल zone के General Manager (GM) और zone से संबंधित Pricipal / Head Of Department अधिकारियों तक भी पहुंचता है।
क्योंकि मंडल की performance की समीक्षा और रेलवे बोर्ड के निर्देशों का जोन स्तर पर कार्य सुनिश्चित करना zonal administration की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
और अगर कोई कमी ऐसी है जो रेलवे बोर्ड की policy , norms , funding , monitoring या national level passenger amenities से जुड़ी है , तो फिर सवाल रेलवे बोर्ड में बैठे अधिकारियों से भी होना चाहिए।
रेलवे बोर्ड के अलग–अलग dirocterates , विशेषकर passenger amenities , infrastructure , engineering , commercial और संबंधित administrative authorities की भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि CAG ने जिस कमी को चिन्हित किया है , वह किस विभाग के अधिकार क्षेत्र की है।
रेलवे बोर्ड की संरचना में infrastructure , passenger amenities committee , station development , civil engineering , traffic commercial और अन्य संबंधित directorates मौजूद हैं।
छत्तीसगढ़ और बिलासपुर जोन की बात करें तो….
CAG की ताज़ा रिपोर्ट में जिन आठ स्टेशनों के water cooler samples में E.Coli bacteria मिला , उनमें बिलासपुर , रायपुर , दुर्ग या SECR का कोई स्टेशन शामिल नहीं है। CAG के ऑडिट रिपोर्ट में SECR से संबंधित passenger amenities की कमियां सामने आई हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ में SECR के स्टेशनों पर दिव्यांग फ्रैंडली रैंप , पार्किंग , walkways , टॉयलेट और trolley pathways जैसी सुविधाओं के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगाए गए हैं।
अंत में , यात्री सुविधा कोई एहसान नहीं है , यह रेलवे की जिम्मेदारी है। और CAG की रिपोर्ट के बाद अब जरूरत है , सिर्फ सुधार के आदेश की नहीं , बल्कि उच्च स्तर में पदस्थ बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की।
abc newz के अगले episode में रेलवे मंत्रालय के ऊपर आई CAG रिपोर्ट्स की परत दर परत का खुलासा करेंगे , बने रहिए हमारे साथ।
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