छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले में बहतराई स्थित स्व. बी. आर. यादव राज्य प्रशिक्षण केंद्र में छत्तीसगढ़ की आवासीय तीरंदाज अकादमी संचालित है।
सरकार खुद इस अकादमी को खिलाड़ियों को तैयार करने का महत्वपूर्व केंद्र बताती है। लेकिन अब इसी अकादमी के खिलाड़ियों के equipment को लेकर ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं , जिनका जवाब खेल एवं युवा कल्याण विभाग को देना होगा। SECL के CSR fund का पैसा उपलब्ध है , archery equipment की जरूरत स्पष्ट है , खिलाड़ी अकादमी में मौजूद है , टेंडर प्रक्रिया कई बार की जा चुकी है , फिर भी कई महीनों से equipment खिलाड़ियों तक क्यों नहीं पहुंच रहा ?
SECL (south eastern coalfields ltd.) के CSR fund में पहले भी बिलासपुर कलेक्टर और PWD कार्यालय भ्रष्टाचार कर चुके हैं।
मामला 2018 का है , उस समय बिलासपुर के कलेक्टर संजय अलंग थे। abc newz के पास उपलब्ध दस्तावेज़ के अनुसार , खिलाड़ियों के लिए SECL मुख्यालय के ठीक सामने खेल परिसर विकसित करने के उद्देश्य से SECL के CSR fund से लगभग 2 करोड़ 25 लाख की राशि स्वीकृत/जारी किए जाने की बात सामने आती है। इस प्रोजेक्ट में खिलाड़ियों के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाएं विकसित की जानी थी….
* Football ground
* Basketball Court (outdoor)
* Volleyball Court (outdoor)
* Boys and Girls changing room
* LED display board
और अन्य संबंधित कार्य
यानी उद्देश्य साफ था , बिलासपुर और अन्य जिलों के खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं देना , लेकिन बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय और PWD division 2 के अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट में खुलकर भ्रष्टाचार किया और SECL के CSR fund का खूब दोहन किया। इस पूरे प्रोजेक्ट में SECL CSR सेल के अधिकारी भी इस fund में हो रहे भ्रष्टाचार को चुप–चाप देखते रहे। कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट में लगभग 80 लाख खर्च हुए और टेंडर विवादों में फंस गया और आखिरी में टेंडर को बीच में ही निरस्त करना पड़ा। इस पूरे मामले में SECL कार्यालय की खूब फजीहत हुई। इतनी फजीहत होने के बावजूद SECL ने फिर एक बार राज्य के खेल एवं युवा कल्याण विभाग को archery equipment और खिलाड़ियों की diet के लिए करोड़ों रुपए sanction कर दिए , जिससे कि SECL के CSR cell की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

archery equipment खरीदी में एक बार फिर SECL के CSR fund का दुरुपयोग !!
abc newz के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार archery equipment की खरीदी (GeM portal से) प्रक्रिया में लगातार देरी हुई है और टेंडर प्रक्रिया बार–बार निरस्त/असफल होने की स्थिति में पहुंच गई। सवाल ये उठ रहा है कि खेल विभाग में बैठे अधिकारी टेंडर की प्रक्रिया को कई महीने से पूरी क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
बहतराई स्टेडियम में प्रशासनिक कार्यालय में सहायक संचालक ए. एक्का और खेल अधिकारी सुशील अमलेश की योग्यता के ऊपर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। अगर इन अधिकारियों के ऊपर खिलाड़ियों से संबंधित खरीदी की जवाबदेही है और ये कार्य को अंज़ाम नहीं दे पा रहे हैं तो शासन को काबिल अफसरों को स्टेडियम में नियुक्त करना चाहिए, जिससे खिलाड़ियों को समय से equipments मिल सके।

archery equipment tender के लिए purchase committee की भूमिका भी जांच के घेरे में !!
अगर archery equipment tender के लिए विभाग ने कोई purchase committee/procurement committee बनाई है , तो उसकी पूरी संरचना सार्वजनिक की जानी चाहिए। कौन अध्यक्ष है , कौन सदस्य है , क्या इसमें बिलासपुर के ADM या finance से संबंधित अधिकारी शामिल हैं ? किस अधिकारी को technical scrutiny की जिम्मेदारी दी गई ? किस अधिकारी को finance scrutiny करनी थी ? किस अधिकारी ने tender document approve किया ? किसने comparative statement देखा ? किसने technical bids का परीक्षण किया और आखिर में किसने टेंडर को स्वीकार या निरस्त करने की अनुशंसा की ? यह जानकारी सामने आने के बाद ही तय हो सकेगा कि देरी किस स्तर पर हुई।

खेल विभाग के अधिकारी खिलाड़ियों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं !
यह बहुत ही गंभीर मामला है। सरकारी फाइल आज नहीं तो कल पूरी हो जाएगी , लेकिन खिलाड़ियों की ट्रेनिंग का समय वापस नहीं आएगा। बहतराई स्टेडियम की archery academy में यदि बच्चों को competition–standard equipment समय पर नहीं मिलता , तो उनकी technical development , equipment familiarity , tuning practice , consistency और competition preparation बूरी तरह प्रभावित हो सकती है। और जब खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में जाएगा , तो दूसरे राज्यों की well–equipped academies के खिलाड़ियों से मुकाबला करेगा। ऐसे में सवाल है….
क्या हमारे खिलाड़ियों को बराबर competitive resource मिल रहे हैं ?
* सरकार talent खोज रही है।
* Academy चला रही है।
* Coaches रख रही है।
* CSR से करोड़ों रुपए आ रहे हैं।
लेकिन equipments खरीदी प्रक्रिया ही कई महीने अटक जाए तो talent development की पूरी chain कमज़ोर हो जाती है।
SECL के CSR fund का पैसा , फिर भी खिलाड़ी इंतेज़ार में क्यों ?
बहतराई स्टेडियम तीरंदाजी अकादमी के लिए equipments खरीदी का टेंडर लगभग 1 crore 78 लाख का है। यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि इस procurement (खरीदी) के पीछे SECL के CSR funding की बात सामने आ रही है। अगर किसी PSU (public sector enterprise/SECL) ने खिलाड़ियों के लिए archery equipment की खरीदी के उद्देश्य से CSR राशि उपलब्ध कराई है , तो उस राशि का outcome भी दिखाई देना चाहिए। CSR का मतलब केवल पैसा sanction करना नहीं है , CSR का मतलब है जिस उद्देश्य के लिए पैसा दिया गया , उस उद्देश्य को ज़मीन पर पूरा करना। अगर पैसा है और equipment की purchasing नहीं हो पा रही है कई महीनों से , बार–बार टेंडर निरस्त हो रहा है , तो कायदे से SECL को sanction order निरस्त करना चाहिए। अब देखना यह है कि SECL के CSR cell के अधिकारी किस स्तर पर इस टेंडर की monitoring कर रहे हैं।
सवाल यह है कि जिस अधिकारी तंत्र को खिलाड़ियों के लिए equipment खरीदना था , वह अपनी जिम्मेदारी समय पर क्यों नही निभा पा रहे हैं ? इस पूरे खरीदी सिस्टम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी अधिकारी की लापरवाही से खरीदी में अनावश्यक देरी हुई , तो निश्चित रूप से उसकी administrative accountability तय होनी चाहिए। और अगर purchase committee की गलती से टेंडर बार–बार निरस्त हो रहा है , तो committee के प्रत्येक ज़िम्मेदार सदस्य की भूमिका की जांच होनी चाहिए। क्योंकि खेल विभाग की फाइल रुक सकती है , टेंडर फिर निकाला जा सकता है , लेकिन खिलाड़ी का खोया हुआ training time वापस नहीं लाया जा सकता।
बहतराई स्टेडियम के अंदर अकादमी के होनहार खिलाड़ियों ने सरकार से कोई एहसान नहीं मांगा है। वे सिर्फ वही सुविधा मांग रहे हैं जिसके लिए अकादमी बनाई गई है और जिसके लिए SECL के CSR का पैसा उपलब्ध कराया गया है।
SECL (बिलासपुर मुख्यालय) का CSR का पैसा अगर बहतराई स्टेडियम की archery academy के लिए दिया गया है , तो यह पैसा अधिकारियों की सुविधा या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य और उनकी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए है। इस राशि का उद्देश्य बच्चों को बेहतर और आवश्यक खेल उपकरण उपलब्ध कराना है , ताकि वे नियमित अभ्यास कर सकें और राज्य , राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रौशन कर सकें।
इसलिए SECL के CSR की राशि को फाइलों , दफ्तरों और टेंडर की देरी में नहीं , बल्कि मैदान में खिलाड़ी के हाथ और उसके equipment में दिखाई देना चाहिए। SECL और राज्य के खेल अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि इस पैसे का पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करें–क्योंकि यह किसी अधिकारी का पैसा नहीं , खिलाड़ियों के हक का पैसा है।
हमारे you tube और instagram को follow और subscribe करें…abc newz _india


