SECL बिलासपुर मुख्यालय के CSR शाखा को लेकर लगातार गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। छत्तीसगढ़ की कुछ फर्मों , सामाजिक संस्थाओं और NGOs का आरोप है कि उनके CSR प्रस्तावों को बार–बार रोका जा रहा है , लंबित रखा जा रहा है या बिना स्पष्ट कारण के आगे नहीं बढ़ाया जा रहा।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रस्ताव जमा करने के बाद उन्हें स्पष्ट समय–सीमा , लिखित कारण या पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी जाती। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि CSR cell में स्थानीय आवेदकों और छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ अधिकारियों द्वारा उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा , बदतमीजी की जा रही है। बार –बार आवेदकों को ऑफिस के चक्कर कटवाए जाते हैं।
इन शिकायतों के बीच CSR cell से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की फर्मों के प्रस्ताव बार–बार रोक दिए जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

वहीं CSR cell के महाप्रबंधक सी.एम.वर्मा की प्रशासनिक निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रस्ताव लंबे समय तक लंबित हैं और लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं , तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है ?
मामले में SECL के निदेशक (मानव संसाधन) Biranchi Das की भूमिका और विभागीय निगरानी की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। सवाल यह है कि CSR शाखा में स्थानीय प्रस्तावों को किन कारणों से लंबे समय तक रोका जा रहा है।
CSR फंड का उद्देश्य केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करना नहीं , बल्कि शिक्षा , स्वास्थ्य , पर्यावरण , कौशल विकास , ग्रामीण विकास और स्थानीय समुदायों के हित में वास्तविक काम करना है। ऐसे में यदि स्थानीय फर्मों और सामाजिक संस्थाओं के प्रस्ताव अनावश्यक रूप से लंबित रखे जा रहे हैं , तो इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ के विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
आपको बता दें कि SECL के CSR cell द्वारा बिलासपुर प्रशासन को दिए गए स्पोर्ट्स अधोसंरचना फंड में खूब भ्रष्टाचार हुआ था , जिसमें SECL प्रशासन की भी खूब किरकिरी हुई थी , बावजूद इसके SECL ने फिर एक बार बिलासपुर के स्टेडियम के लिए CSR फंड जारी किया है , जिसका टेंडर कई बार कैंसिल हो चुका है , इस मामले में SECL के अधिकारी एक बार फिर से कटघरे में हैं।

abc newz मांग करता है कि SECL प्रबंधन इस मामले में पारदर्शी जांच कराए और CSR शाखा से संबंधित सभी प्रस्तावों की समीक्षा करे। प्रस्तावों को रोकने के कारण , निर्णय लेने की प्रक्रिया और ज़िम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सार्वजनिक की जाए।
abc newz का सवाल–
क्या SECL में CSR प्रस्तावों की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है ? स्थानीय संस्थाओं के प्रस्ताव बार–बार क्यों अटक रहे हैं ? क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी ? और क्या SECL प्रबंधन इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करेगा ?
abc newz इस मामले में SECL प्रबंधन , CSR cell के अधिकारियों और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रसारित करेगा।
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