अहमदाबाद । 4 से 10 सितंबर 2026
गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रिवर फ्रंट में आयोजित हुंडई पैरा वर्ल्ड आर्चरी सीरीस 2026 अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली पैरा तीरंदाज टोमन कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन पदक हासिल कर छत्तीसगढ़ एवं देश का गौरव बढ़ाया है।

टोमन कुमार ने प्रतियोगिता में टीम इवेंट में स्वर्ण पदक , मिक्सड टीम इवेंट में कांस्य पदक तथा व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। मिक्सड टीम स्पर्धा में टोमन कुमार ने जम्मू–कश्मीर की शीतल देवी के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया।
भारतीय तीरंदाज़ी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मुरारका ने टोमन कुमार की इस शानदार उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी। कैलाश ने कहा कि टोमन कुमार की यह सफलता छत्तीसगढ़ की तीरंदाजी के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है और यह उपलब्धि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों एवं तीरंदाजों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

टोमन कुमार के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन से ये साबित हो गया है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं। यह भी गौरव का विषय है कि विश्व स्तरीय पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन भारत में गुजरात के अहमदाबाद में किया गया है। इस ऐतिहासिक आयोजन से भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में और अधिक मजबूत पहचान मिली है।
कैलाश मुरारका ने कहा कि टोमन कुमार ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी कमज़ोरी नहीं , बल्कि अपनी ताकत बनाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना उनके मजबूत इरादों और कठिन परिश्रम का परिणाम है। उनकी उपलब्धियां छत्तीसगढ़ के दूसरे खिलाड़ियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

छत्तीसगढ़ की तीरंदाजी आज राष्ट्रीय ही नहीं , बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। राज्य के खिलाड़ियों की इस कामयाबी के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत , प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और खेल संगठन की भूमिका अहम रही है। इसी कड़ी में एक नाम सामने आता है–कैलाश मुरारका
कैलाश मुरारका छत्तीसगढ़ आर्चरी एसोसिएशन में सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं और वर्तमान में Archery Association Of India के उपाध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी के प्रशासन से जुड़े हैं। कैलाश मुरारका की संगठनात्मक यात्रा ने छत्तीसगढ़ की तीरंदाजी को लंबे समय तक मजबूती देने में भूमिका निभाई है। राज्य स्तर पर खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचान दिलाने , उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में संघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर उनका लगातार जोर रहा है।

कैलाश मुरारका के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता खिलाड़ियों को केंद्र में रखना बताई जाती है। एक समय छत्तीसगढ़ की तीरंदाजी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। आज इसी राज्य के खिलाड़ी देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीत रहे हैं। यह बदलाव केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है , यह खिलाड़ियों की कठिन मेहनत , प्रशिक्षकों के समर्पण और खेल संघ की निरंतर कोशिशों का परिणाम है।
लेकिन इस पूरी यात्रा में कैलाश मुरारका जैसे खेल प्रशासकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आती है। कैलाश मुरारका का संदेश साफ है–प्रतिभा को अवसर मिले , खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिले और छत्तीसगढ़ की तीरंदाजी को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिले।

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