भारत में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा सवाल खड़ा हो रहा है , जिसे अब सत्ता और विपक्ष दोनों को गंभीरता से लेना होगा।
जिस काम की जिम्मेदारी सरकारों की है–स्कूलों की जर्ज़र इमारतें ठीक करना , समय पर किताबें पहुंचाना , बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना , स्कूलों तक बेहतर सड़क बनाना और बच्चों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना , उसके लिए अब कॉकरोच जनता पार्टी के ” स्कूल ठीक करो अभियान ” को सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका राजस्थान के स्कूलों में निरीक्षण कर चुके हैं और उनके मुताबिक अभियान के दौरान उठाई गई कई मांगों को राजस्थान सरकार ने स्वीकार भी किया है। कॉकरोच जनता पार्टी का दावा है कि यह अभियान पूरे देश भर में चलाया जाएगा।
लेकिन असली सवाल इससे भी बड़ा है–क्या देश में छात्रों और युवाओं को अपनी पढ़ाई छोड़कर स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा ?
अगर किसी सरकारी स्कूल में किताब नहीं है , इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है , स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क नहीं है , शौचालय नहीं है या बच्चों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं , तो इसका जवाब आंदोलन कर रहे छात्रों से नहीं , सरकार और संबंधित शिक्षा विभाग से मांगा जाना चाहिए।
और यह विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़ा करता है….
विपक्ष आखिर कहां है ?
अगर छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था के सवाल पर सड़क पर हैं , तो क्या विपक्षी दलों को उनके साथ खड़ा नहीं होना चाहिए ? क्या शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरना विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं है ?
यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है , यह देश की नई पीढ़ी का सवाल है।

Gen–Z से यह उम्मीद करना कि वह अपनी पढ़ाई छोड़कर लगातार सरकारी सिस्टम की कमियां ठीक करवाने के लिए आंदोलन करे , लोकतंत्र और शासन व्यवस्था दोनों के लिए बेहद गंभीर चेतावनी है।
सरकारें बदलती हैं , राजनीतिक दल बदलते हैं , लेकिन स्कूल की घंटी , बच्चों की किताब और शिक्षक की जिम्मेदारी , इनका कोई राजनीतिक रंग नहीं होना चाहिए।
आज सवाल कॉकरोच जनता पार्टी से ज्यादा सत्ता व्यवस्था से है। अगर स्कूल ठीक कराने के लिए भी युवाओं को सड़क पर उतरना पड़े , तो फिर सरकार की प्राथमिकता क्या है ?
और विपक्ष से भी सवाल है–अगर आज आप जनता के मुद्दों पर सड़क पर नहीं उतरेंगे , तो आखिर कब उतरेंगे ?

आम जनता का सवाल साफ है –बच्चों का काम पढ़ना है , सरकार का काम व्यवस्था बनाना है। अगर देश के बच्चे व्यवस्था सुधारने सड़क पर आ गए हैं , तो यह सिर्फ आंदोलन नहीं , पूरे सिस्टम के लिए आईना है।
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