बिलासपुर: (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में स्पोर्ट्स किट सप्लाई के टेंडर कंडीशन के साथ छेड़छाड़ का मामला सुर्खियों में है, ठेकेदार ने समग्र शिक्षा कार्यालय द्वारा की जा रही अनियमितता को हाइकोर्ट में चुनौती दी, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। देखिए हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या तर्क दिए गए…..

vinishma technologies pvt ltd ने स्पोर्ट्स किट सप्लाई के किन-किन टेंडर कंडीशन में आपत्ति जताई थी…..
पहला : टेंडर की शर्त में लिखा था कि टेंडर डालने वाली फर्म के पास पिछले 3 वित्तीय वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार के विभागों में कम से कम 6 करोड़ की खेल सामग्री सप्लाई का अनुभव हो।
दूसरा : दूसरी शर्त में लिखा था कि जो भी फर्म टेंडर में भाग लेना चाहती है, उसके पास भारत में GST cerificate होना अनिवार्य है, और टेंडर डालने वाली तारीख तक छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले 5 सालों से फर्म का संचालन होना चाहिए।
तीसरा : तीसरी शर्त में लिखा गया कि जो फर्म तकनीकी बोली को सफलतापूर्वक पूरा कर लेगी, उसे तीन दिन के अंदर स्पोर्ट्स किट के सैंपल जमा करने होंगे।
चौथा: टेंडर दस्तावेज की शर्त में ये लिखा गया कि weighing scale (वज़न नापने की मशीन) के OEM (manufacturer) को NABCB से संबद्ध ISO 9001 & 13845 सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य है।
ऊपर की चारों टेंडर कंडीशन को वादी vinishma technologies pvt ltd ने छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट में रीट पिटिशन के माध्यम से चैलेंज किया। हाइकोर्ट ने राज्य शासन के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ vinishma technologies pvt ltd ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई के पश्चात किन तर्कों और आधार पर टेंडर को रद्द करने का आदेश दिया…. देखिए
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के स्पोर्ट्स किट सप्लाई टेंडर को रद्द करने के मामले में साफ तौर पर कहा कि जो शर्त थी– पिछले तीन वित्तीय वर्षों में राज्य की एजेंसियों को कम से कम 6 करोड़ के खेल सामग्री सप्लाई का अनुभव हो, वह संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) और अनुच्छेद 19 (1) (g) (व्यापार/ व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है ।
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा दिया गया तर्क कि छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, इसलिए केवल उन सप्लायर्स पर भरोसा किया जा सकता है, जिसको राज्य सरकार की एजेंसियों को सामग्री आपूर्ति का पूर्व अनुभव हो को कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के कुछ जिले ही नक्सलवाद से प्रभावित हैं, ना कि पूरा छत्तीसगढ़। उक्त तथ्यों के आधार पर राज्य के बाहर की फर्मों को टेंडर से बाहर नहीं किया जा सकता।
विचाराधीन निविदा, सुरक्षा के प्रति संवेदनशील उपकरण के लिए नहीं है, बल्कि खेल किट की आपूर्ति के लिए है, जिसमें कोई विशेष जोखिम वाला मामला नहीं है। सक्षम सप्लायर स्थानीय सप्लाई चेन की मदद लेकर स्पोर्ट्स किट की सप्लाई कर सकता है। इन सब आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि टेंडर की शर्तें मनमानी, अनुचित एवं भेदभावपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट ने ” Doctrine of Level Playing Field” की बात कही, अर्थात सभी योग्य दावेदारों को सामान अवसर मिलना चाहिए। केवल स्थानीय अनुभव के आधार पर किसी फर्म को बाहर कर देना सही नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष : छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट के आदेश दिनांक 11.8.2025 और 12.8.2025 को पारित आदेश के साथ-साथ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाई और हायर सेकेंडरी के विद्यार्थियों को खेल किट की आपूर्ति हेतु जारी किये गए टेंडर दिनांक 21.07.2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त एवं रद्द किया गया (quash and set aside)
छत्तीसगढ़ राज्य में आप लगातार इन जुमलों को सुनते आ रहे होंगे कि विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और भ्रष्टाचार के दोषियों पर कड़ी जाँच व कार्यवाही जारी रहेगी । छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत हो रहे टेंडर में लगातार टेंडर अर्हताओं (eligibilty criteria) से छेड़छाड़ कर सक्षम ठेकेदारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
हमनें पहले भी अपनी खबरों के माध्यम से ये बताया था कि राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग में कैसे बड़े अधिकारियों और चँद बड़े ठेकेदारों का nexus काम कर रहा है और टेंडर प्रक्रिया के साथ कैसे बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हो रही है। इसी कड़ी में अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग का sports kit का टेंडर निरस्त किया और सरकार को फटकार लगाई। स्पोर्ट्स किट का टेंडर शुरू से ही विवादों में है।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के आने के बाद से ही कुछ विभागों में GeM portal के माध्यम से हो रहे टेंडर्स को लेकर भारी भ्रष्टाचार सामने आ रहा है । ज्यादातर विभागों ने टेंडर को केंद्रीकृत कर कुछ बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए पूरा सिस्टम तैयार करके रखा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि सामग्री को तीन गुना दरों से खरीदा जा रहा है। भाजपा के तीनों कार्यकाल और काँग्रेस शासन में भी ज्यादातर विभागों में सामग्रियां rate contract के माध्यम से खरीदी जा रहीं थी, जो बहुत हद्द तक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत थी। छत्तीसगढ़ राज्य के छोटे, मध्यम सप्लायर्स को भी तमाम विभागों में कार्य मिल जाते थे, जो अभी की भाजपा सरकार में बाहर कर दिए गए हैं।

आपको बता दें कि जब स्पोर्ट्स किट सप्लाई का टेंडर लगाया गया, उस वक्त स्कूल शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सम्हाल रहे थे, वर्तमान में विभाग मंत्री गजेंद्र यादव के पास है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी हैं और समग्र शिक्षा विभाग के संचालक संजीव झा हैं। स्पोर्ट्स किट टेंडर के मामले में समग्र शिक्षा कार्यालय हर बार सुर्खियों में रहता है , और लगातार टेंडर प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे स्कूली बच्चों को समय से किट सप्लाई नहीं हो पा रही है। मुख्यमंत्री को इस विभाग में बैठे अधिकारियों के ऊपर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए और काबिल अधिकारियों की तत्काल पोस्टिंग कर गवर्नेंस का मॉडल पेश करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को राज्य के व्यापारियों के लिए एक पारदर्शी नीति बनानी चाहिए, जिससे राज्य के msme सेक्टर को बढ़ावा मिल सके और राज्य शासन के समस्त विभागों में टेंडर प्रक्रिया को लेकर व्यापारी हर तरफ से संतुष्ट रहें।
abc newz के साथ बने रहिए

