बिलासपुर (chhattisgarh) 7 जनवरी 2025 को बिलासपुर में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय परिसंवाद कार्यक्रम यूनिवर्सिटी कैंपस में रखा गया था। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और अन्य प्रदेशों से ख्यातिलब्ध साहित्यकार और कथाकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान एक अजीब वाकया हुआ जिससे यूनिवर्सिटी के कुलपति आलोक चक्रवाल के उद्बोधन की लगातार साहित्यकारों, पत्रकारों ने भर्त्सना का सिलसिला आज तक जारी रखा है। आलोक चक्रवाल द्वारा एक कथाकार के साथ की गई कथित तौर पर बदतमीज़ी को लेकर देश के वरिष्ठ साहित्यकारों और पत्रकारों ने अपने facebook wall पर पोस्ट डालकर चक्रवाल को आड़े हाथों लिया। इसी कड़ी में देश के दो जाने माने साहित्यकार और पत्रकार की पोस्ट के अंश हम आपसे साझा कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति आलोक चक्रवाल के बारे में कहा कि इन्होंने अपनें यहां आमंत्रित किए गए ख्यातिनाम साहित्यकार का अपमान किया है। साहित्य अकादमी और गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने संयुक्त कार्यक्रम में पूरे देश से ख्यातिनाम साहित्यकारों को आमंत्रित किया था, इसी कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक चक्रवाल ने हिंदी के बड़े कथाकार मनोज रुपड़ा से बदतमीजी की थी।
वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल ने अपने facebook wall के माध्यम से आलोक चक्रवाल द्वारा की गई हरकत की घोर निंदा करते हुए भर्त्सना की। सतीश जायसवाल ने साहित्यकार जगत के सभी साथियों से कहा कि इस घटना का संयुक्त रूप से विरोध होना चाहिए। सतीश आगे लिखते हैं कि कुलपति आलोक चक्रवाल को समझाना होगा कि विश्वविद्यालय उनकी जागीर नहीं है। सतीश जायसवाल ने आगे कहा कि इस शर्मनाक घटना में साहित्य अकादमी की अनुपस्थिति भी साहित्यकारों के सम्मान के प्रति उपेक्षा को दर्शाती है, यह भी आपत्तिजनक है, इस पर सभी साहित्यकारों को विचार करना चाहिए।
उधर मध्यप्रदेश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राकेश पाठक ने भी अपने facebook wall के माध्यम से कथाकार मनोज रुपड़ा के साथ कुलपति आलोक चक्रवाल के व्यवहार को बददिमाग कुलपति की संज्ञा दी। कुलपति की बदतमीजी पर राकेश पाठक लिखते है कि, इस प्रकरण में कुलपति की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है, लेकिन उससे भी ज्यादा दुर्भाग्य की बात ये है कि कुलपति की इस हरकत के बाद भी बाकी के साहित्यकार मंच से लेकर सभागार तक में मुंह में दही जमाए बैठे रहे। राकेश पाठक आगे लिखते हैं, कुछ बेशर्म साहित्यकारों ने तो इस घटना के बाद भी उस महा बेशर्म कुलपति के हाथों सम्मान भी ग्रहण किया। ये सारे लोग कुलपति के अपराध के बराबर के अपराधी हैं।

इस पूरी घटना को लेकर देश भर के साहित्यकार, कथाकार, कवि एवं मूर्धन्य पत्रकारों ने कुलपति आलोक चक्रवाल की कड़े शब्दों में निंदा की है। छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर में नागरिक मंच के बैनर तले कलेक्टर संजय अग्रवाल को राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा गया, उक्त ज्ञापन बिलासपुर के अतिरिक कलेक्टर शिव कुमार बनर्जी ने ग्रहण किया।

नागरिक मंच ने साहित्यकार मनोज रुपड़ा के साथ कुलपति द्वारा की गई बदतमीजी की घोर निंदा और भर्त्सना की। ज्ञापन सौंपने वालों में वरिष्ठ शिक्षक और कवि संजय पांडे, विभिन्न सामाजिक संगठनों से मुनिव शुक्ला, राजीव अवस्थी और आशीष खंडेलवाल थे। समाजसेवी राजीव अवस्थी ने abc newz को बताया कि कुलपति आलोक चक्रवाल के मामले में ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया गया है कि इस प्रकरण को तुरंत संज्ञान में लेकर कुलपति को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए, जिससे विश्वविद्यालय का वातावरण स्वच्छ और निष्पक्ष हो सके, साहित्यकारों का सम्मान का ख्याल सर्वोपरि होना चाहिए।
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