बिलासपुर : छत्तीसगढ़ सरकार जहां सुशासन तिहार मनाकर जनता की शिकायतों का समाधान करने का दावा कर रही है , वहां बिलासपुर जिले में जल संसाधन विभाग के आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम के तहत नहर लाइनिंग निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल को सौंपी गई शिकायत में कार्यपालन अभियंता (EE) द्वारका प्रसाद जायसवाल और ठेकेदार दीपक अग्रवाल पर करोड़ों रुपए के कथित भ्रष्टाचार , मिलीभगत और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।
मामला जल संसाधन संभाग कोटा, जिला बिलासपुर के अंतर्गत आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम के तहत मुख्य लाइनिंग कार्य से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगभग 12 करोड़ 87 लाख 10 हज़ार रुपए की लागत वाले इस कार्य में करोड़ों रुपयों की अतिरिक्त मात्रा (extra work) स्वीकृत कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल को दी हुई शिकायत में दावा किया गया है कि लगभग 2 करोड़ 35 लाख रुपए तथा 31 लाख 26 हज़ार रुपए की अतिरिक्त मात्रा (extra work) की स्वीकृति बिना वास्तविक आवश्यकता के ली गई है और इस राशि का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करना है। आपको बता दें कि अतिरिक्त कार्य (extra work) की प्रशासनिक स्वीकृति विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी देते हैं। जल संसाधन विभाग बिलासपुर में अतिरिक्त कार्य की अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित नहर का bed level इतना नीचे रखा गया है कि वर्तमान स्थिति में उससे एक हेक्टेयर भूमि की भी प्रभावी सिंचाई संभव नहीं है। किसानों द्वारा लगातार इस पर आपत्ति जताई जा रही है।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नहर लाइनिंग कार्य में गुणवत्ताहीन सीमेंट, लाल गिट्टी और निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि निर्माण की गुणवत्ता इतनी कमज़ोर है कि यह एक बरसात का मौसम भी नहीं झेल पाएगा और सरकारी धन पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा।
अब सवाल यह है कि कलेक्टर संजय अग्रवाल इस मामले में क्या कार्यवाही कर सकते हैं ?
जिले के प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते कलेक्टर संजय अग्रवाल प्रारंभिक जांच के आदेश दे सकते हैं। वे संबंधित विभाग से तकनीकी रिपोर्ट मांग सकते हैं, निर्माण स्थल का निरीक्षण करा सकते हैं, स्वतंत्र जांच समिति गठित कर सकते हैं तथा शिकायत सही पाए जाने पर मामले को उच्च स्तर की जांच एजेंसियों के पास भेज सकते हैं।

यदि वित्तीय अनियमितता, फ़र्ज़ी मापन, गुणवत्ता में कमी या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो विभागीय जांच, वसूली, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने, अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्यवाही की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
फिलहाल शिकायतकर्ता ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मांग की है कि पूरे कार्य की तकनीकी, वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजना की उपयोगिता का मूल्यांकन कराया जाए।
अब बड़ा सवाल ये है कि आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम के तहत नहर लाइनिंग का लगभग 16 करोड़ (extra work मिलाकर) रुपयों की इस सिंचाई परियोजना का वास्तविक लाभ किसानों को मिलेगा या फिर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप सही साबित होंगे ? इसका जवाब शायद कलेक्टर संजय अग्रवाल के पास हो सकता है !!
सुशासन तिहार के बीच सामने आए इन गंभीर आरोपों ने जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें कलेक्टर संजय अग्रवाल की अगली कार्यवाही और संभावित जांच पर टिकी हुई है।

* बिलासपुर जल संसाधन विभाग में नहर निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार !!
* कार्यपालन अभियंता द्वारका प्रसाद जायसवाल और ठेकेदार दीपक अग्रवाल पर गंभीर आरोप !!
* कलेक्टर से शिकायत कर करोड़ों के कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग।
* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का विभाग संदेह के दायरे में !!
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