छत्तीसगढ़ के कटघोरा नगर पालिका से एक ऐसा मामला सामने आया है , जिसने न केवल सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं , बल्कि राजनीतिक विवाद को भी तेज़ कर दिया है।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई की कांस्य प्रतिमा को लेकर उठे सवाल अब गंभीर जांच का विषय बन गए हैं। आरोप है कि जिस प्रतिमा को कांस्य से निर्मित बताया गया था , उसकी जांच के दौरान अन्दर सीमेंट जैसी सामग्री मिलने की बात सामने आई है।
इस मामले को यूथ कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष विकास सिंह ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रतिमा की गुणवत्ता और निर्माण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद की , धरना–प्रदर्शन किया और दोषियों पर कार्यवाही की मांग की।

विकास सिंह कटघोरा नगर पालिका में स्थापित अटल बिहारी बाजपेई की प्रतिमा को लेकर लंबे समय से अधिकारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष विकास सिंह का आरोप है कि प्रतिमा के निर्माण और गुणवत्ता में गंभीर अनियमितता हुई है।
विकास सिंह के विरोध और शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में प्रतिमा के भीतर सीमेंट जैसी सामग्री पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है।
मामले में नगर पालिका के सब इंजीनियर चंद्र प्रकाश जायसवाल को शासन ने निलंबित कर दिया। लेकिन विकास सिंह का कहना है कि केवल निचले स्तर के अधिकारी पर कार्यवाही करना पर्याप्त नहीं है।
उनकी मांग है कि मामले में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी यानी CMO , संबंधित ठेकेदार और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में उनकी जिम्मेदारी तय होती है तो उनके खिलाफ भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्यवाही की जाए।
विकास सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि….
” जो लोग अपने भारत रत्न प्राप्त शीर्ष नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की प्रतिमा की गुणवत्ता से भी समझौता कर सकते हैं , वे आम जनता के विकास कार्यों के साथ किस तरह का व्यवहार करेंगे।

विकास ने यह भी आरोप लगाया कि केवल छोटे अधिकारियों पर कार्यवाही कर बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश चल रही है।
राजनीतिक आरोपों के बीच बड़ा सवाल
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। विकास सिंह का आरोप है कि भाजपा से जुड़े विभिन्न मामलों में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं और अब अटल बिहारी बाजपेई की प्रतिमा से जुड़ा मामला भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।
हालांकि इन राजनीतिक आरोपों पर भाजपा और नगर पालिका प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि प्रतिमा के निर्माण में कौन सी सामग्री स्वीकृत थी , जांच में क्या पाया गया और आगे किस स्तर तक कार्यवाही की जाएगी। बहरहाल विकास सिंह इस मामले में बड़े अधिकारियों के ऊपर तत्काल प्रभाव से FIR की मांग पर अड़े हुए हैं।

कटघोरा में अटल बिहारी बाजपेई की प्रतिमा से जुड़ा मामला अब केवल एक प्रतिमा की गुणवत्ता का सवाल नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या जांच केवल एक निचले स्तर के अधिकारी तक सीमित रहेगी , या फिर ठेकेदार , CMO और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भी भूमिका की जांच होगी ?
विकास सिंह का यह खुलासा आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के नगर निगम , पंचायत और पालिका स्तर में अटल बिहारी बाजपेई प्रतिमा की जांच को लेकर सरकार की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े कर सकता है।
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