बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के तहत गांव–गांव पहुंचकर योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं, जनता की समस्याएं सुन रहे हैं और अधिकारियों को जवाबदेह बना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बिलासपुर जिले के कोटा संभाग अंतर्गत आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम ( canal lining work ) में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
abc newz की टीम जब आमामुड़ा व्यापवर्तन योजना के निर्माण स्थल पर पहुंची तो यहां कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। स्थानीय स्तर और विभागीय सूत्रों ने बताया कि योजना की मॉनिटरिंग कर रहे कार्यपालन अभियंता द्वारका प्रसाद जायसवाल पिछले 18 दिनों से पैर फ्रैक्चर होने की वजह से अपने घर से ही प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। abc newz की टीम को मौके पर न तो SDO मिले और न ही sub engineer और supervisor। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि परियोजना की दैनिक मॉनिटरिंग किसके भरोसे चल रही है। जनता जानना चाहती है कि जब सरकार सुशासन और जवाबदेही की बात कर रही है, तब इतनी महत्वपूर्ण सिंचाई योजना में अधिकारियों की उपस्थिति और निगरानी व्यवस्था क्यों दिखाई नहीं दे रही ?

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सुशासन तिहार दिवस को लेकर सभी कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि, बिना कलेक्टर के अनुमति के जिले के कोई भी अधिकारी मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे।
आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम की देखरेख करने वाले कार्यपालन अभियंता द्वारका प्रसाद जायसवाल लगता है अपने निवास स्थान से ही प्रोजेक्ट चला रहे हैं , शायद तमाम राशियों का भुगतान भी उनके बिलासपुर शहर में निवास से ही हो रहा है , फील्ड से सब अधिकारी गायब हैं , यह बहुत गंभीर मामला है। प्रथम दृष्टया आर्थिक अनियमितता का मामला भी बन सकता है। कोटा संभागीय मुख्यालय को द्वारका प्रसाद जायसवाल ने मज़ाक बना रखा है। इस पूरे भ्रष्टाचार के मामले में क्या बिलासपुर जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल संज्ञान लेंगे ? क्या संजय अग्रवाल कार्यपालन अधिकारी द्वारका प्रसाद जायसवाल की जगह किसी काबिल अफसर की पोस्टिंग करेंगे ? या फिर ये भ्रष्टाचार का खेल यूं ही चलता रहेगा। कुल मिलाकर आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम के पूरे प्रोजेक्ट और EE द्वारका प्रसाद जायसवाल की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सामान्यतः जल संसाधन विभाग में यदि कार्यपालन अभियंता बीमारी, अवकाश या अन्य कारणों से अनुपस्थित हों, तो विभागीय व्यवस्था के अनुसार संबंधित SDO, सहायक अभियंता अथवा किसी अन्य कार्यपालन अभियंता को अतिरिक्त प्रभार (additional charge) दिया जा सकता है। मुख्य अभियंता (CE) का दायित्व होता है कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित न हो पाए। लेकिन द्वारका प्रसाद जायसवाल के पैर फ्रैक्चर होने के बावजूद उनको अपने घर से प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करने दी जा रही है, जो अपने आप में गंभीर मामला है। CE जितेंद्र नेताम को तत्काल संज्ञान लेकर काबिल अफसर को चार्ज देना चाहिए, जिससे प्रोजेक्ट सुचारू रूप से चल सके।
1200 ” हेक्टेयर सिंचाई का दावा , लेकिन ज़मीन पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल ! ?
” नहर में दरारें , बेड लेवल पर विवाद और किसानों की चिंता ! “
” क्या आमामुड़ा व्यापवर्तन योजना में तकनीकी चूक हुई या फिर होगी बड़ी जांच ? “
चूंकि जल संसाधन विभाग राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का अपना विभाग है, इसलिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस मामले में उच्चस्तरीय जांच, थर्ड पार्टी ऑडिट , गुणवत्ता परीक्षण तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दे सकते हैं।

यदि किसी जांच में सरकारी धन की हानि, फ़र्ज़ी मापन, घटिया सामग्री से निर्माण या अन्य वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो विभागीय कार्यवाही के साथ–साथ भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों द्वारा भी जांच की जा सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम वास्तव में किसानों को लाभ पहुंचाएगी, या फिर साइट में हो रहे भ्रष्टाचार की निष्पक्ष तकनीकी जांच करानी पड़ेगी ? किसानों को जवाब चाहिए और लगभग 16 करोड़ की इस परियोजना पर जल संसाधन विभाग को जवाब देना होगा।
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