आजादी के 75 साल बाद भी सड़क का इंतजार, जानलेवा नाले को पार करने को मजबूर बच्चे !
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों रुपए की लागत से सड़कें बनाई जा रही हैं। लेकिन जिन सड़कों को आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास का माध्यम बनना था , उन्हीं सड़कों की गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क हांथ से खोदने पर उखड़ जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, और कई जगह निर्माण कार्य अधूरा तथा निर्धारित समय से काफी पीछे चल रहा है।

बैगा आदिवासियों के नाम पर विकास या बड़ा खेल ?
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिले में लगभग 31 सड़क परियोजनाएं करीब 420 करोड़ रुपए की लागत से संचालित की जा रहीं हैं। इनमें से कई सड़कें बैगा आदिवासियों और PVTG समुदायों को बेहतर संपर्क सुविधा देने के उद्देश्य से स्वीकृत हुईं थीं।
पिछले कई महीनों से तमाम मीडिया चैनल्स में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास PM–JANMAN योजना के तहत बन रही सड़कों में हो रहे बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे हैं , प्रमुख अखबार दैनिक भास्कर ने भी शानदार रिपोर्टिंग करके PMGSY कार्यालय के अंतर्गत हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। निलेश बिस्वास ने कोटा ब्लॉक की पंचायतों में सड़क निर्माण को लेकर हाइकोर्ट में जनहित याचिका भी लगाई है, जिसे हाइकोर्ट स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है, जल्द ही इसमें सुनवाई होने वाली है। इस पूरे प्रकरण में PMGSY बिलासपुर कार्यालय के SE वरुण सिंह राजपूत और EE परीक्षित सूर्यवंशी की भूमिका संदेह के दायरे में हैं। अगर इनकी समयबद्ध निष्पक्ष जांच हो जाए तो बहुत बड़े पैमाने पर घोटाले सामने आ सकते हैं। इस मामले में कोटा विधानसभा के विधायक अटल श्रीवास्तव भी नाराज़गी जाहिर कर चुके हैं।
सड़क नहीं, मौत का रास्ता ! जानलेवा नाले को पार कर स्कूल जाते बच्चे ।
प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास के सघन दौरे के पश्चात abc newz से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत परसापानी , बंगला भाटा और छतौना क्षेत्र की सड़कों का हाल बहुत ही डरावना है। आदिवासियों से बात करने के पश्चात निलेश बिस्वास कहते हैं कि आजादी के 75 वर्षों के बाद भी ज्यादातर गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं, अधिकारी सिर्फ जुमलों तक ही सीमित हैं , करोड़ों रुपयों का बजट किसकी जेब में जा रहा है , समझ से परे है। छतौना क्षेत्र के स्कूली बच्चों को जानलेवा जुनवानी नाला पार करके घर जाना पड़ता है। बरसात के दौरान यह नाला उफान पर रहता है और स्थानीय लोग लगातार किसी बड़े हादसे की आशंका जता रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास का कहना है कि स्कूलों की स्थिति बद से बदतर है। स्कूलों में बच्चियों और महिला शिक्षकों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है, स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं , किसी भी वक्त बहुत बड़ा हादसा हो सकता है,

मिड–डे मील किचन की हालत देखने से लगता है कि वहां बन रहा बच्चों के लिए खाना कभी भी ज़हर का रूप ले सकता है। कुल मिला के शासन में बैठे निकम्मे अधिकारियों को छोटे–छोटे होनहार बच्चों के भविष्य से कोई लेना–देना नहीं है। बिस्वास कहते हैं जमीन पर सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है।

हाल ही में आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कोटा ब्लॉक की PM–JANMAN के तहत बन रही सड़क का निरीक्षण किया था। अब देखना यह है कि निरीक्षण के बाद सोनमणि बोरा क्या कार्यवाही करते हैं और किन–किन अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हैं, इस पर अब पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं। प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास कहते हैं, अगर समय रहते सोनमणि बोरा निष्पक्ष जांच करेंगे, तो ही क्षेत्र की जनता को न्याय मिल पाएगा।
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