बिलासपुर : छत्तीसगढ़ सरकार खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने के दावे करती है। लेकिन बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में स्वर्गीय बी. आर. यादव खेल प्रशिक्षण केंद्र की हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नज़र आती है। करोड़ों रुपयों के प्रोजेक्ट्स पिछले कई वर्षों से अधूरे पड़े हैं , हॉस्टलों की हालत खराब है , खेल मैदानों का रखरखाव नहीं हो रहा है और खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में तीरंदाजी , एथलेटिक्स और हॉकी अकादमी संचालित है। यहां सैकड़ों खिलाड़ी गर्ल्स और बॉयस हॉस्टल में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन जिन सुविधाओं के सहारे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना चाहिए , वही सुविधाएं आज बदहाली का शिकार हैं।

हॉकी टर्फ ग्राउंड में नियमित सिंचाई और रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं है , जिसकी वजह से कृत्रिम घास खराब हो रहा है , जिससे खिलाड़ियों को सही सर्फेस नहीं मिल पा रहा है। फुटबॉल ग्राउंड की घास और खरपतवार एक समान दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है कि आउटडोर स्टेडियम की रंगाई–पुताई कई वर्षों से नहीं हुई है , जिससे पूरा परिसर जर्ज़र और उपेक्षित नज़र आता है।
boys और girls हॉस्टल में मरम्मत और पुताई के कार्यों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। PWD अधिकारियों के निकम्मेपन की वज़ह से ठेकेदार ने कई जगहों पर काम अधूरा छोड़ दिया है। दीवारों की स्थिति बहुत खराब हालत में है और रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता है। खिलाड़ियों को जिस वातावरण में रहकर तैयारी करनी चाहिए, वह वातावरण पूरी तरह से PWD अधिकारियों की वज़ह से दूषित हो चुका है।

सबसे गंभीर मामला उन प्रोजेक्ट्स का है जो कई वर्षों से अधूरी पड़ी हुई है। कबड्डी हॉल आज भी अधूरा पड़ा हुआ है , हॉल के अंदर maple wood की फ्लोरिंग होनी है , इसका अता–पता नहीं है , इनडोर हॉल की भी maple wood flooring लगभग 12 सालों से अधूरी पड़ी हुई है , जिसमें लगभग 10 प्रकार के इनडोर गेम्स खेले जाने हैं। बैडमिंटन , वॉलीबॉल , बास्केटबॉल , मार्शल आर्ट्स और अन्य खेलों के खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के इनडोर सुविधाएं बेहद आवश्यक होती हैं , लेकिन बहतराई स्टेडियम में खिलाड़ी आज भी इन सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई खेल परियोजना 10 से 15 साल तक अधूरी रहती है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों को होता है। आधुनिक एथलेटिक ट्रैक , इनडोर स्टेडियम , जिम, रिकवरी सेंटर और ट्रेनिंग सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी तकनीकी रूप से पिछड़ जाते हैं। दूसरी ओर जिन राज्यों में बेहतर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है , वहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में आगे निकल जाते हैं।
खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि खेल प्रतिभा की उम्र सीमित होती है। यदि खिलाड़ी को 15 से 25 वर्ष की उम्र के दौरान पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलतीं , तो उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने का समय निकल जाता है। इसका सीधा असर राज्य के मैडल , राष्ट्रीय रैंकिंग और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व पर पड़ता है।

सवाल यह है कि बिलासपुर PWD division 2 के अंतर्गत आने वाले इस स्टेडियम के लिए PWD कार्यालय को विगत कई वर्षों से दिए गए करोड़ों रुपए आखिर क्यों भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिए गए ? रखरखाव के लिए मिलने वाली राशि किसकी जेब में चली गई ? हॉस्टल , मैदान और खेल सुविधाओं की बदहाली का जिम्मेदार कौन है ? और सबसे बड़ा सवाल , क्या PWD अधिकारियों की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की कीमत छत्तीसगढ़ के होनहार खिलाड़ियों को अपने करियर (career) से चुकानी पड़ रही है।
बहतराई स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं , बल्कि हज़ारों खिलाड़ियों के सपनों का केंद्र है। यदि समय रहते अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं किए गए और खेल सुविधाओं का रखरखाव नहीं सुधारा गया , तो इसका नुकसान केवल खिलाड़ियों का नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के खेल भविष्य को उठाना पड़ेगा। अब देखना होगा कि सरकार और ज़िम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे पर क्या कार्यवाही करते हैं।
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