बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका अब आदिवासी अंचल के विकास की नई उम्मीद बनती दिखाई दे रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास की पहल पर पहले बंगलाभाटा की सड़क को मंजूरी मिली और अब परसापानी में सड़क और जुनवानी नाले पर पुल निर्माण का मामला भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के परसापानी और बंगलाभाटा ग्राम पंचायतों में वर्षों से सड़क और पुल–पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास ने छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
बंगलाभाटा मामले में हाइकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव मुकेश कुमार बंसल से जवाब–तलब किया। इसके बाद सचिव ने व्यक्तिगत शपथपत्र (personal affidavit) हाइकोर्ट में प्रस्तुत किया। अब बंगलाभाटा में लगभग 1 किलोमीटर सड़क निर्माण को प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है और करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस सड़क (box culvert सहित) का टेंडर जारी किया जा चुका है।
अब निगाहें परसापानी ग्राम पंचायत की सड़क और ब्रिज पर टिकी हैं। यहां सड़क निर्माण और जुनवानी नाले पर पुल बनाने का प्रस्ताव बिलासपुर PWD ब्रिज डिवीजन द्वारा तैयार कर मुख्य अभियंता कार्यालय रायपुर भेजा गया है। प्रस्ताव में सड़क की लंबाई , चौड़ाई और लगभग 4 crore 35 लाख रुपए की प्राक्कलन लागत (estimate) का उल्लेख किया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य की निगरानी PWD ब्रिज डिवीजन के कार्यपालन अभियंता (EE) द्वारा किए जाने की संभावना है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि परसापानी ग्राम पंचायत की सड़क और ब्रिज का टेंडर बरसात के बाद कभी भी लगाया जा सकता है।
आगामी जुलाई महीने में, हाइकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान PWD विभाग को हाइकोर्ट के समक्ष यह बताना होगा कि परसापानी में सड़क और ब्रिज निर्माण के लिए अब तक क्या प्रगति हुई है। ऐसे में PWD विभाग की कार्यप्रणाली पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
स्थानीय आदिवासी लोगों का कहना है कि निलेश बिस्वास पिछले कई महीनों से परसापानी और बंगलाभाटा पंचायतों की मूलभूत सुविधाओं के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यही नहीं परसापानी मिडिल स्कूल की जर्ज़र स्थिति और अन्य अव्यवस्थाओं का मुद्दा उठाने के बाद बिलासपुर जिले के शिक्षा विभाग के DEO रामेश्वर जायसवाल ने जांच के आदेश जारी किए थे। जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
अगर ग्राम पंचायत परसापानी के सड़क और पुल निर्माण प्रस्ताव को भी जल्द मंजूरी मिलती है , तो यह आदिवासी बहुल क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी राहत साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि हाइकोर्ट के निगरानी और निलेश बिस्वास की जनहित याचिका के दबाव के बीच PWD विभाग इस परियोजना को कितनी तेज़ी और गंभीरता से आगे बढ़ाता है।
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