Episode 2. बिलासपुर : छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत संचालित आमामुड़ा व्यापवर्तन योजना (diversion scheme) पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। मुख्य नहर यानी माइनर लाइनिंग के कार्य में बड़े स्तर के भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि नहर निर्माण में सीमेंट, रेत और गिट्टी का उपयोग तय मानकों और अनुपात के अनुसार नहीं किया गया। निर्माण कार्य में लाल और हल्की गिट्टी का इस्तेमाल किया गया, जिसे क्वालिटी के हिसाब से बहुत ही कमज़ोर माना जाता है। आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम के टेंडर दस्तावेज़ को देखने के बाद और फिर ग्राउंड ज़ीरो की स्थिति के इंस्पेक्शन करने के बाद साफ नज़र आता है कि यह योजना पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। कैनल लाइनिंग कार्य में घटिया मटेरियल इस्तेमाल के पीछे किसानों और ग्रामीणों में काफी रोष देखा जा रहा है। आपको बता दें कि इस पूरी योजना की लागत 12 करोड़ 87 लाख 10 हज़ार रुपयों की है, और यह टेंडर 30 जुलाई 2026 तक पूरा होना है। इस टेंडर के मामले में एक और गंभीर बात सामने निकल के आ रही है , इसी टेंडर के लिए अधिकारियों ने ” एक्स्ट्रा वर्क ” के नाम से 2 करोड़ 67 लाख 26 हज़ार की राशि का सैंक्शन कराया है , इस एक्स्ट्रा राशि के मामले में कोई भी टेंडर नहीं कराया गया है , मतलब क्रय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं , और इस मामले में कार्यपालन अभियंता (EE) द्वारका जायसवाल की भूमिका को संदिग्ध तौर से देखा जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस ” अतिरिक्त मात्रा ” की राशि पूरी तरह से एडजस्ट (AD) कर ली जाएगी , इस राशि से कोई भी कार्य शायद नहीं कराया जाएगा। ये पूरी राशि सिर्फ और सिर्फ बिल वाउचर में दिखाई जाएगी।

किसानों के हक की योजना में अधिकारियों द्वारा डाका !!
आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जिन खेतो में सिंचाई पहुंचनी चाहिए, वहां नहर का ” bed level ” खेतों से नीचे बना दिया गया है। जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड अधिकारियों (नाम न छापने की शर्त पर) ने abc newz को बताया कि तकनीकी रूप से देखा जाए तो ऐसी स्थिति में पानी खेतों तक पहुंचना लगभग असंभव माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि बेड लेवल ऊंचा बनाया जाता तो सिंचाई संभव हो सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
कुल मिलाकर आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम के तहत चल रहे कैनल लाइनिंग कार्य में सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार की परतें चढ़ाई जा रहीं है , इस मामले में जल संसाधन विभाग के EE द्वारका जायसवाल की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। अब मांग उठ रही है कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
abc newz के सवाल
* क्या करोड़ों खर्च होने के बाद भी किसानों को सिंचाई नहीं मिलेगी ?
* क्या ” एक्स्ट्रा वर्क ” के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है ?
* क्या गुणवत्ता जांच केवल कागज़ों तक सीमित रही ?
* आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही कब होगी ?
आपको बता दें कि यदि किसी परियोजना में भ्रष्टाचार, फर्जी बिलिंग, कम गुणवत्ता या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप साबित होते हैं, तो कार्यपालन अभियंता (EE) की जवाबदेही सीधे तय हो सकती है। विभागीय जांच में लापरवाही, मिलीभगत या निगरानी में विफलता सामने आने पर निलंबन, विभागीय कार्यवाही और आर्थिक रिकवरी तक की प्रक्रिया हो सकती है।
अगले episode में हम आपको बताएंगे कि जल संसाधन विभाग बिलासपुर में 18% और 0.5% का गणित क्या कहता है , और बड़े अधिकारियों की इसमें क्या भूमिका है। बने रहिए abc newz के साथ।
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