बिलासपुर : (छत्तीसगढ़) बिलासपुर शहर के सिटी कोतवाली थाना के सामने स्थित करीब 70 साल पुराने भक्त कंवरराम कपड़ा मार्केट में बनी नई CC (cement concrete) सड़क अब सवालों के घेरे में है। लगभग 50 दुकानदारों के इस व्यस्त कपड़ा बाज़ार में नगर निगम द्वारा करीब 6 लाख 50 हज़ार रुपए की लागत से लगभग 10 फीट चौड़ी और 300 मीटर लंबी CC रोड का निर्माण कराया गया। लेकिन सड़क बनने के तुरंत बाद व्यापारियों द्वारा की गई भ्रष्टाचार की शिकायत से निगम सकते में है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क की मोटाई और क्वालिटी में गड़बड़ी हुई है , तो निर्माण के दौरान नगर निगम के ज़िम्मेदार इंजीनियर और अधिकारी आखिर कर क्या रहे थे ?

जानकारी के अनुसार इस सड़क का निर्माण ठेकेदार ऋषि सोनी द्वारा कराया गया। निगम के जोन कार्यालय की ओर से यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण के दौरान ड्रेनेज सिस्टम तक बाधित कर दिया गया , जिससे बरसात का पानी अब सीधे मार्केट में भरने लगा है।
जोन कमिश्नर अनंत मैडम ने abc newz को बताया कि ठेकेदार ऋषि सोनी को पूरी सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए हैं। यदि ऐसा है तो यह अपने आप में स्वीकारोक्ति है कि निर्माण कार्य में खूब भ्रष्टाचार की परत चढ़ाई गई है। जोन कमिश्नर अनंत का कहना है कि वो इस मामले को काफी गंभीरता से मॉनिटर कर रहीं हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल केवल ठेकेदार पर नहीं है। जब सड़क का निर्माण हो रहा था , तब क्या नगर निगम के उप अभियंता , सहायक अभियंता और कार्यपालन अभियंता नियमित मॉनिटरिंग कर रहे थे ? क्या सीमेंट , गिट्टी , रेत , कंक्रीट की गुणवत्ता और सड़क की निर्धारित मोटाई की जांच की गई। ? क्या प्रत्येक चरण का माप पुस्तिका (measurement book) में सही रिकॉर्ड दर्ज़ किया गया ? यदि सबकुछ नियमों के हिसाब से हुआ , तो फिर कुछ ही समय में सड़क उखाड़ने की नौबत क्यों आ गई ?

किसी भी सरकारी निर्माण में केवल ठेकेदार ही ज़िम्मेदार नहीं होता। निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों की भी कानूनी तथा प्रशासनिक जिम्मेदारी होती है। यदि घटिया निर्माण हुआ है , तो केवल सड़क दोबारा बनवाना पर्याप्त नहीं है।
यह भी तय होना चाहिए कि –
* घटिया निर्माण की अनुमति किसने दी ?
* गुणवत्ता प्रमाणित किस अधिकारी ने की ?
* भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची ?
* सरकारी धन की बर्बादी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्यवाही होगी ?
भक्त कंवरराम मार्केट बिलासपुर का प्रमुख और प्रतिष्ठित कपड़ा बाज़ार है , जहां प्रतिदिन हज़ारों ग्राहक खरीदी के लिए पहुंचते हैं। बरसात में सड़क पर पानी भरने से ग्राहक बाज़ार आने से बचते हैं। दुकानों तक पहुंचना मुश्कित हो जाता है। कपड़ा व्यापारियों के लिए नमी और पानी सबसे बड़ा खतरा है , जिससे लाखों रूपयों का माल खराब होने की आशंका रहती है , व्यापार प्रभावित होता है , बिक्री घटती है और सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय व्यापारियों को उठाना पड़ता है।

स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कंवरराम मार्केट के आसपास शनिचरी बाज़ार , सब्ज़ी बाज़ार और घनी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। यदि ड्रेनेज पहले से कमज़ोर था , तो सड़क निर्माण से पहले उसका सुधार क्यों नहीं किया गया ? अगर ठेकेदार ऋषि सोनी ने ड्रेनेज लाइन बंद कर दी , तो निगम के इंजिनियर ने उसी समय काम क्यों नहीं रुकवाया। क्या निर्माण के दौरान निगरानी केवल कागज़ों में होती रही ?
भक्त कंवरराम मार्केट की सड़क अब सिर्फ एक निर्माण कार्य मामला नहीं रह गया है , बल्कि यह सवाल बन गया है कि जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाले विकास कार्यों की मॉनिटरिंग आखिर कौन करेगा ? यदि सड़क बनते ही उखाड़नी पड़ रही है , तो इसका खामियाजा व्यापारी , ग्राहक और आम जनता क्यों भुगते ?

अब निगाहें इस बात पर है कि नगर निगम केवल सड़क दोबारा बनवाएगा या फिर घटिया निर्माण के लिए ज़िम्मेदार ठेकेदार और संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही करेगा।
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