बिलासपुर : बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत परसापानी के मिडिल स्कूल की तस्वीरें सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। abc newz की ग्राउंड रिपोर्ट में स्कूल की जर्ज़र इमारत , अस्वच्छ मिड डे मील रसोई , बच्चों के बैठकर भोजन करने की अव्यवस्थित व्यवस्था , घटिया स्तर की खेल सामग्री और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के लगभग दो सप्ताह के बाद भी कार्यवाही जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। प्रभारी BEO गोपाल कृष्ण दुबे और ABEO नवनीत तंबोली की भूमिका संदिग्ध नजर आती है , ये दोनों अधिकारी जांच रिपोर्ट सौंपने में जानबूझ कर देरी कर रहे हैं , कल को परसापानी मिडिल स्कूल में बड़ी घटना हो जाती है तो इसके ज़िम्मेदार सीधे इन दोनों अधिकारियों को ही माना जाएगा। प्रभारी DEO रामेश्वर जायसवाल की भी प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।

abc newz की टीम जब परसा पानी मिडिल स्कूल पहुंची तो वहां का दृश्य बेहद ही चिंताजनक था। बच्चे उसी कक्षा में रखी डैस्क पर बैठकर मिड डे मील खा रहे थे , जहां पढ़ाई भी होती है। अलग भोजन कक्ष की व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
रसोईघर का निरीक्षण करने पर दीवारों में भारी सीलन , गंदगी , बदबू और लंबे समय से रखरखाव न होने जैसी स्थिति दिखाई दी। यदि वास्तव में भोजन ऐसी परिस्थितियों में तैयार किया जा रहा है , तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और खाद्य स्वच्छता के मानकों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

खेल सामग्री की क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विद्यार्थियों ने दावा किया कि बैडमिंटन रैकेट बहुत जल्दी टूट गया , कैरम बोर्ड बहुत ही छोटे साइज का है , कहीं से भी उपयोगी नहीं है और क्रिकेट बैठ बिना ग्रिप के उपलब्ध कराया गया। यदि यह दावा सही पाया जाता है , तो खेल सामग्री की खरीद और गुणवत्ता की जांच भी आवश्यक हो जाती है।

सबसे गंभीर आरोप मिडिल स्कूल की शिक्षिकाओं की तरफ से आया। इनका कहना है कि स्कूल में शौचालय ही नहीं है। छात्राओं और शिक्षिकाओं का कहना है कि इस स्कूल में शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसी भी स्कूल में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव शिक्षा के अधिकार और गरिमापूर्ण वातावरण दोनों पर सवाल खड़ा करता है।

abc newz की ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद प्रभारी ज़िला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ( वर्तमान में हाइकोर्ट से नियुक्ति पर रोक) ने कोटा ब्लॉक के प्रभारी BEO गोपाल कृष्ण दुबे को जांच के निर्देश दिए। लेकिन आज तक जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। प्रभारी BEO गोपाल कृष्ण दुबे का कहना है कि उन्होंने प्रभारी प्रभारी ABEO नवनीत तंबोली को जांच सौंप दी है। वही प्रभारी ABEO नवनीत तंबोली का कहना है कि उन्हें अब तक कोई लिखित जांच आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। कुल मिलाकर जांच DEO , BEO और ABEO के बीच ही काफी दिनों से घूम रही है। इससे ये साफ समझ में आता है कि ये अधिकारी अपने विभाग के प्रति कितने गंभीर हैं। यदि यह स्थिति सही है , तो यह प्रशासनिक समन्वय की गंभीर कमी को दर्शाता है और यह भी प्रश्न उठता है कि आखिर जांच शुरू क्यों नहीं हुई।

अब सबसे बड़ा सवाल–
* क्या जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगा ?
* क्या बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में भी प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी ?
* क्या ज़िम्मेदार अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही होगी ?
इन सवालों का जवाब अब बिलासपुर के शिक्षा विभाग को देना होगा। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत में नहीं होना चाहिए।
abc newz को आप अब हमारे you tube और instagram में follow कर सकते हैं…abcnewz_india


