Episode 1. बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में जल संसाधन विभाग की बहुचर्चित आमामुड़ा व्यापवर्तन योजना अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पहले से टेंडर जारी होने और कार्य स्वीकृत होने के बावजूद करोड़ों रुपयों का ” एक्स्ट्रा वर्क ” यानी अतिरिक कार्य नियमों को ताक में रखकर स्वीकृत कराया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं – क्या यह विकास है या फिर सरकारी पैसों का खुला खेल ?
बिलासपुर जिले में चल रही आमामुड़ा डायवर्शन स्कीम ( canal lining work ) किसानों के लिए खेत सिंचाई का बड़ा सपना बताई गई थी। लेकिन अब इसी योजना में जम कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
किसानों का आरोप है कि कैनल लाइनिंग के काम में घटिया मटेरियल लगाया जा रहा है, नहर का बेड लेवल (bed level) गलत बनाया गया है और करोड़ों रुपए के एक्स्ट्रा वर्क बिना पारदर्शिता के स्वीकृत कराए गए हैं। सवाल यह है कि क्या जनता के टैक्स के पैसों से बन रही सिंचाई परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है ?
सबसे बड़ा सवाल ” एक्स्ट्रा वर्क ” को लेकर उठ रहा है। सूत्रों के अनुसार टेंडर होने के बाद उसी परियोजना में करोड़ों रुपए का अतिरिक्त कार्य स्वीकृत कराया गया है।
अब नियम क्या कहते हैं ??
सरकारी निर्माण कार्यों में टेंडर जारी होने के बाद सीमित परिस्थितियों में अतिरिक्त कार्य कराया जाता सकता है, लेकिन उसके लिए तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक अनुमति, उचित कारण और वित्तीय नियमों का पालन जरूरी होता है। यदि अतिरिक्त कार्य मूल कार्य की सीमा से बाहर हो, लागत अत्यधिक बढ़ जाए, या प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे सैंक्शन दिए जाएं, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता और जांच का विषय बन सकता है।
यानी सवाल यह है कि – क्या आमामुड़ा कैनल लाइनिंग परियोजना में नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाई गई , या फिर करोड़ों रुपयों के नाम पर सिस्टम को ही “लाइनिंग” कर दिया गया।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि नहर का बेड लेवल नीचे होने की वजह से खेतों में सिंचाई नहीं हो सकती…. घटिया काम चल रहा है… इसकी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया काम हो रहा है, यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो करोड़ों की यह परियोजना किसानों के लिए सफेद हांथी साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नहर निर्माण में बेड लेवल की छोटी सी गलती भी पूरे सिंचाई तंत्र को प्रभावित कर सकती है। अगर बेड लेवल नीचे है, तो पानी का दबाव और प्रवाह प्रभावित होगा, जिससे अंतिम छोर के किसानों तक पानी कभी भी नहीं पहुंच पाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल…
* क्या जल संसाधन विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा ?
* क्या घटिया निर्माण और करोड़ो के एक्स्ट्रा वर्क की तकनीकी जांच होगी ?
कायदे से तो आमामुड़ा परियोजना में हो रहे भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए , क्योंकि यह मामला सीधे हमारे अन्नदाताओं के खेतों की सिंचाई से जुड़ा हुआ है, जो बहुत ही संवेदनशील पहलू है। किसानों के हक के पानी में जल संसाधन विभाग का डाका डालना कहीं से भी उचित नहीं है।
अगले एपिसोड में हम आपको बताएंगे कि किसानों के लिए बन रहे इस प्रोजेक्ट में हो रहे भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं , और इस पूरे नेक्सस में कौन–कौन से अधिकारी शामिल हैं, बने रहिए abc newz के साथ…
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