बिलासपुर : (छत्तीसगढ) सिर्फ 8 से 9 घंटे की मूसलाधार बारिश…. और पूरे बिलासपुर की तस्वीर बदल गई। सड़कें नज़र नहीं आई , कॉलोनियां तालाब बन गई , वाहन पानी में डूब गए। सवाल ये है कि क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा है या फिर वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा ?
बिलासपुर को स्मार्ट सिटी कहा जाता है। करोड़ों रुपए विकास कार्यों पर खर्च किए गए। लेकिन पहली बड़ी बारिश ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी।
यातायात पुलिस के अनुसार श्रीकांत वर्मा मार्ग , माेपका पुलिस चौकी के सामने , वसंत विहार मार्ग , गौरव पथ और सरकंडा क्षेत्रों सहित कई प्रमुख मार्गों पर जलभराव से हालात बेहद गंभीर हैं।

दूसरी ओर जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आज की सभी बैठकें निरस्त कर अधिकारियों को लगातार फील्ड में रहने के निर्देश दिए। यह कदम स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि इसे औपचारिक रूप से ” आपातकाल ” घोषित किए जाने की सार्वजनिक सूचना सामने नहीं आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल…
* क्या सिर्फ 8 से 9 घंटे की बारिश में पूरा शहर जलमग्न हो जाना सामान्य है ?
* क्या बिलासपुर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है ?
* क्या वर्षों पहले शुरू हुई सीवरेज परियोजना और उसकी तकनीकी कमियों का असर आज सामने आ रहा है ?
* क्या नालों की समय पर सफाई नहीं हुई ?
* क्या pre monsoon तैयारी सिर्फ और सिर्फ कागज़ों तक सीमित रही ?
अगर मौसम विभाग पहले से बारिश की चेतावनी देता है , तो फिर जिला प्रशासन , नगर निगम और आपदा प्रबंधन की संयुक्त तैयारी कहां थी ?

आपदा प्रबंधन के नियम क्या कहते हैं ?
भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम , 2005 के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) होता है , जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करते हैं।
जिला प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियां होती हैं…
pre monsoon तैयारी और जोख़िम आंकलन
* जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान
* नालों और ड्रेनेज की सफाई सुनिश्चित करना
* राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखना
* नागरिकों के लिए एडवायजरी और चेतावनी जारी करना
* आवश्यक होने पर कंट्रोल रूम और आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय करना
* विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना
यदि किसी क्षेत्र में स्थिति गंभीर हो , तो जिला प्रशासन तत्काल राहत , बचाव और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए कदम उठाता है।

बिलासपुर की तस्वीर कई सवाल छोड़ रही है…
क्या यह केवल असाधारण बारिश का असर था ? या फिर शहर की योजना , ड्रेनेज सिस्टम , सीवरेज प्रबंधन और pre monsoon तैयारियों में गंभीर कमियां उजागर हुई हैं ?
इन सवालों के उत्तर संबंधित विभागों की जांच, तकनीकी रिपोर्ट और प्रशासनिक समीक्षा से ही स्पष्ट होंगे।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है- जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों की समीक्षा , त्वरित राहत और भविष्य में ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए प्रभावशील योजना।
abc newz को आप अब हमारे you tube और instagram में follow कर सकते हैं…abcnewz_india


