बिलासपुर : (छत्तीसगढ़) बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के परसापानी मिडिल स्कूल की बदहाली उजागर होने के बाद प्रभारी ज़िला शिक्षा अधिकारी (वर्तमान में हाइकोर्ट से नियुक्ति पर रोक) रामेश्वर जायसवाल ने जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन लगभग दो सप्ताह बीतने के बाद भी यदि जांच पूरी नहीं हुई है या उसकी रिपोर्ट सामने नहीं आई है , तो सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की जवाबदेही पर खड़ा होता है।

क्या प्रभारी ज़िला शिक्षा अधिकारी का आदेश की कोई कीमत नहीं है ? या फिर BEO गोपाल कृष्ण दुबे द्वारा आदेशों के पालन में गंभीर लापरवाही हो रही है।
abc newz ने जब परसापानी मिडिल स्कूल (कोटा ब्लॉक) की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाई , तब अति जर्ज़र भवन , अस्वच्छ मिड डे मील रसोई , शौचालय का अभाव , खराब खेल सामग्री और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दे सामने आए। इसके बाद प्रभारी ज़िला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल ने कोटा के BEO गोपाल कृष्ण दुबे को जांच के निर्देश दिए , लेकिन आज तक जांच हुई है या नहीं, रिपोर्ट कहां है , कुछ पता नहीं है , और तो और इस गंभीर मामले को लेकर प्रभारी ज़िला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल और BEO गोपाल कृष्ण दुबे ने abc newz का फोन उठाना भी बंद कर दिया है जिसका मतलब साफ है कि इन दोनों अधिकारियों को स्कूली बच्चों के भविष्य से कोई लेना देना नहीं है।

BEO गोपाल कृष्ण दुबे का कहना है कि उन्होंने जांच ABEO नवनीत तंबोली को सौंप दी है। वहीं ABEO का कहना है कि उन्हें लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यदि दोनों अधिकारियों के बयान यही हैं , तो यह प्रशासनिक समन्वय की गंभीर विफलता का संकेत है। सबसे अधिक नुकसान और जोख़िम उन बच्चों का हो रहा है जो आज भी उसी जर्जर जानलेवा स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी केवल कार्यालय चलाने के लिए नहीं , बल्कि ब्लॉक के सभी सरकारी स्कूलों की निगरानी , निरीक्षण और जिला शिक्षा अधिकारी के आदेशों के पालन के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी हैं। सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (ABEO) की भी जिम्मेदारी है कि सौंपे गए कार्यों का समयबद्ध पालन करें और निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

यदि जांच लंबित है , तो यह मामला उठना स्वाभाविक है कि जिम्मेदारी किसकी तय होगी ? यदि आदेशों के बाद भी समय पर जांच नही होती , तो इससे पूरे शिक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं।
सबसे बड़ा सवाल….
* क्या परसापानी मिडिल स्कूल के बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला भी सरकारी फाइलों में दब जाएगा ?
* क्या प्रभारी ज़िला शिक्षा अधिकारी अब देरी के कारण BEO और ABEO से लिखित जवाब मांगेंगे ?
* क्या जिम्मेदारी तय होगी ?
* या फिर आदेश जारी होंगे.. और बच्चे उसी जर्ज़र जानलेवा स्कूल में पढ़ते रहेंगे ?
* इन सवालों का जवाब अब बिलासपुर शिक्षा विभाग को देना होगा।

परसापानी ग्राम पंचायत के आदिवासी बहुल गांव की मांग….
* परसापानी मिडिल स्कूल की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
* जांच में हुई देरी की जिम्मेदारी तय की जाए।
* जर्ज़र भवन , घटिया मिड डे मील रसोई और शौचालय की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए।
* यदि आदेशों के पालन में लापरवाही पाई जाती है , तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाए।
abc newz को आप अब हमारे you tube और instagram में follow कर सकते हैं…abcnewz_india


