बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में गर्मी और आंधी–तूफान आते ही बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आती है। घंटों ब्लैकआउट, बार–बार ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मर ब्लास्ट, जर्जर केबल और लो–वोल्टेज की समस्या अब आम जनता की किस्मत बन चुकी है। सवाल ये है कि आखिर करोड़ों रुपए के मेंटेनेंस के बावजूद बिजली विभाग हर साल फेल क्यों हो जाता है ?
abc newz की पड़ताल में सामने आ रहा है कि बिजली विभाग के अंदर अधिकारियों, सप्लायर्स और ठेकेदारों का एक बड़ा nexus काम कर रहा है, जहां जनता की सुविधा से ज्यादा घूसखोरी और फाइलों का खेल चलता दिखाई देता है।
मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का खेल
हर वर्ष प्री–मॉनसून और समर मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपए स्वीकृत किए जाते हैं। दावा किया जाता है कि….
* पुराने तार बदले जाएंगे
* जर्जर पोल सुधारे जाएंगे
* ट्रांसफार्मर अपग्रेड होंगे
* फ़ीडरों की मरम्मत होगी
लेकिन ज़मीनी हकीकत में कई इलाकों में वही जर्जर ट्रांसफार्मर और वही ढीला सिस्टम दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फाइलों में काम पूरा दिखा दिया जाता है, लेकिन मौके पर अधूरा या घटिया काम होता है।
किन उपकरणों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार की आशंका ??
1. ट्रांसफार्मर खरीद और रिपेयरिंग
सबसे बड़ा खेल ट्रांसफार्मर में माना जाता है। आरोप है कि पुराने ट्रांसफार्मर को रिपेयर बताकर नए का बिल लगाया जाता है, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए जाते हैं, घटिया कॉपर और ऑयल का उपयोग होता है, जरूरत वाले क्षेत्रों में नए ट्रांसफार्मर नहीं लगाए जाते। इसीलिए थोड़ी गर्मी आते ही ट्रांसफार्मर में ब्लास्ट होते रहता है।
केबल्स और वायरिंग में घोटाला
हाइटेंशन वायरिंग में भारी बजट खर्च होता है। लेकिन आरोप यह है कि घटिया क्वालिटी वाले केबल उपयोग किए जाते हैं, पुराने केबल्स को नया बताकर भुगतान लिया जाता है, कम मोटाई के तार लगाए जाते हैं, टेंडर में पसंदीदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाता है, फर्म के हिसाब से टेंडर कंडीशन में हेरफेर किया जाता है। इन सबके कारण बारिश और तूफान में लाइन फेल होना आम बात हो गई है।
पोल और इंसुलेटर सप्लाई
कई क्षेत्रों में पोल और इंसुलेटर सालों से नहीं बदले जाते। बिजली विभाग पर आरोप यह भी है कि रिकॉर्ड में नए पोल दिखाए जाते हैं, वास्तविक पोल की संख्या फील्ड में कम लगाई जाती है, घटिया मटेरियल का उपयोग किया जाता है।
फर्जी मेंटेनेंस और पेपर वर्क
सूत्रों के अनुसार कई बार बिना काम किए निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जाती है, मेंटेनेंस की फ़र्ज़ी एंट्री होती है, लाइन क्लियरेंस और टेस्टिंग सिर्फ़ कागज़ों में होती है। यानी “मेंटेनेंस” सिर्फ फाइलों में हो जाता है।
ठेकेदार–अधिकारी nexus कैसे काम करता है ??
abc newz को मिली जानकारी के अनुसार :
* टेंडर प्रक्रिया में सेटिंग का आरोप
* चुनिंदा ठेकेदारों को लगातार काम
* घूस के आधार पर सप्लाई कार्य का पास होना
* घटिया काम पर भी बिल क्लियर होना
* शिकायतों को दबाना
यह पूरा सिस्टम एक “कट प्रतिशत मॉडल” पर चलने के आरोपों से घिरा हुआ है, जहां जनता की परेशानियों से ज्यादा प्राथमिकता भुगतान और घूसखोरी को दी जाती है।
जनता भुगत रही है कीमत
बिजली विभाग में हो रहे कथित भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ रहा है…
* घंटों बिजली कटौती
* बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
* व्यापारियों को भारी नुकसान
* पानी सप्लाई बाधित
* बुजुर्गों की सेहत के साथ खिलवाड़
* इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब
क्या होनी चाहिए जांच ??
विशेषज्ञों का मानना है कि निम्न बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए…
* पिछले पांच वर्षों के टेंडर
* ट्रांसफार्मर खरीद रिकॉर्ड
* केबल सप्लाई की गुणवत्ता जांच
* मेंटिनेंस भुगतान और वास्तविक कार्य
* ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग स्थिति
* फील्ड निरीक्षण बनाम फाइल रिकॉर्ड
abc newz का सवाल ??
क्या बिजली विभाग में जनता के टैक्स के पैसों से “मेंटेनेंस माफिया” चल रहा है ?
क्या हर साल होने वाली बिजली फेल्योर के पीछे सिर्फ मौसम जिम्मेदार है या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें सिस्टम के भीतर तक फैली हुई है ?
अंतिम में , कायदे से तो बिलासपुर जिले के विधायकों और जनप्रतिनिधियों को गंभीर होकर इस मामले में तुरंत अधिकारियों को निर्देश देकर बिजली की व्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त करवाना चाहिए, जिससे आम जनता को त्वरित राहत की सांस मिल सके।
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