“नमस्कार! आप देख रहे हैं abc newz की खास रिपोर्टिंग…..
बिलासपुर : (छत्तीसगढ़) और आज हम उठाने जा रहे हैं एक बड़ा सवाल— क्या छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में बिजली व्यवस्था मौसम की मार से गिरी है या सिस्टम की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार से ??
सिर्फ 20 मिनट की आंधी और 30 मिनट की बारिश…. और पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। क्या यही है स्मार्ट सिटी और स्मार्ट प्रशासन ??
कल बिलासपुर शहर में हल्की सी प्राकृतिक आपदा ने बिजली विभाग की पूरी तैयारी की पोल खोलकर रख दी है। जगह–जगह बिजली लाइनों पर पेड़ गिरे मिले, तार टूटे, ट्रांसफॉर्मर बंद पड़ गए और कई घंटे शहर अंधेरे में डूबा रहा।

सवाल नंबर 1– जिम्मेदार कौन ?
जब बिजली विभाग को पता है कि हर साल आंधी–तूफान आता है, तो पेड़ों की छटाई क्यों नहीं हुई ? क्या लाइन मेंटिनेंस का काम सिर्फ कागज़ों में ही चल रहा है क्या ?
सीधा सवाल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से …
1. जब ऊर्जा विभाग आपके पास है, तो क्या यह आपकी सीधी जिम्मेदारी नहीं बनती ?
2. क्या बिलासपुर की बिजली व्यवस्था पहले से ही जर्जर थी ?
3. हर साल थोड़े ही आंधी–तूफान या बारिश में यही हाल क्यों होता है – क्या कोई स्थाई समाधान नहीं ?
4. मेंटिनेंस और अधोसंरचना पर खर्च का हिसाब क्या है ?
5. क्या अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से काम सिर्फ कागज़ों में हो रहा है ?
6. इस ब्लैकआउट के लिए किस अधिकारी पर कार्यवाही होगी ?
7. क्या आप जनता को समयबद्ध सुधार की गारंटी देंगे ?

जिम्मेदारी कैसे तय होगी ?
* अगर तकनीकी फेल्योर है तो पूरी तरह से विभागीय टीम और मेंटिनेंस टीम जिम्मेदार
* अगर लापरवाही है तो अधिकारियों पर कार्यवाही जरूरी
* अगर बजट खर्च के बावजूद सुधार नहीं हो रहा है तो नीतिगत स्तर पर जवाबदेही सीधे सरकार और मुख्यमंत्री की
* अगर बार–बार यही समस्या बनी रहती है और सिस्टम फेल्योर होता है तो अंतिम जिम्मेदारी ऊर्जा मंत्री यानी सीधे मुख्यमंत्री पर
बिलासपुर अंधेरे में डूबा हुआ है लेकिन सवाल रोशनी में है। क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जवाब देंगे ?? या फिर हर साल की तरह ये मुद्दा भी अंधेरे में ही रह जाएगा ??
बिलासपुर शहर के तमाम कोनों से आई खबरों के मुताबिक लोगों का कहना है कि जैसे ही तेज़ हवा चली, बिजली के खंभे हिलने लगे, तार टूट गए और एक के बाद एक ट्रांसफार्मर ठप्प होने लगे। इसके बाद पूरे शहर में अंधेरा छा गया। पुलिस विभाग को भी भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस विभाग के पास संख्याबल सीमित होने से जैसे तैसे मामले को हैंडल किया गया , गनीमत है कि बिलासपुर शहर में ब्लैकआउट के आड़ में कोई भी अप्रिय घटना नहीं घटित हुई। आपको बता दें कि बिलासपुर शहर में ये कोई पहली घटना नहीं है , हर साल बिजली विभाग का यही रोना–धोना है, शहर के नेता और बड़े अधिकारी अपनी–अपनी लक्जरी जिंदगी में मौज कर रहे है और जनता को उनके बदहाली में छोड़ दिया गया है।
संभावित भ्रष्टाचार की परतें
abc newz की जांच में कुछ गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं…
* क्या घटिया स्तर के केबल्स और ट्रांसफार्मर लगाए गए ?
* क्या ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी बिलिंग हो रही है ?
* क्या मेंटिनेंस के नाम से सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है ?
क्या होनी चाहिए त्वरित कार्यवाही ??
1. पूरे शहर के बिजली अधोसंरचना का इमरजेंसी ऑडिट
2. खराब ट्रांसफार्मर और तारों का तुरंत रिप्लेसमेंट
3. जिम्मेदार अधिकारियों का निलंबन और स्वतंत्र एजेंसी से जांच
4. हर जोन में क्विक रिस्पॉन्स टीम की तैनाती
5. सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग प्लान
बिलासपुर शहर में कल 20 मिनट की आंधी और पानी की बौछारों ने जो बिजली विभाग की सच्चाई दिखाई है, वो बेहद चिंताजनक है। स्मार्ट सिटी की कल्पना पूरी तरह से धराशाई हो गई है , सिर्फ जुमलेबाजी की बात इस शहर में बची है, ज्यादातर विभागीय खेल कागज़ों में खेला जा रहा है। अब देखना ये होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर सिर्फ बयानबाजी करते हैं या वाकई सिस्टम को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाते हैं।
अपने पाठकों से निवेदन है कि छत्तीसगढ़ के किसी भी कोने से बिजली विभाग की नाकामियों की तस्वीर आती है , तो हमें आप वीडियो फुटेज या फोटो भेज सकते हैं , हमारी कोशिश रहेगी कि आपकी भेजी हुई तस्वीरों के माध्यम से विभाग की जवाबदेही तय की जाय…

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