बिलासपुर (chhattisgarh) : भारत में बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग (national highway) देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन राजमार्गों की वजह से यातायाल की सुविधा बढ़ती है, यात्रा का समय कम होता है और माल ढुलाई सरल तथा तेज होती है । इससे ग्रामीण और और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होता है, जिससे रोज़गार और व्यापार के नए अवसर बनते हैं।
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से ईंधन की बचत होती है, वाहन संचालन की लागत कम होती है और लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ती है। इससे समग्र आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं और क्षेत्रीय विकास होता है। साथ ही ये हाइवे राज्यों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संपर्क को भी बढ़ावा देते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
कुछ दिनों पहले हमनें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास की टीम के साथ कोटा विधानसभा के रतनपुर तहसील के ग्राम पंचायत छतौना और परसापानी का सघन दौरा किया था। बिलासपुर से होते हुए रतनपुर से ग्राम छतौना पहुंच मार्ग का भी निरीक्षण किया गया। रत्नपुर से छतौना होते हुए केंवची नेशनल हाइवे के निर्माण का कार्य चल रहा है। यह निर्माण बिलासपुर PWD के NH (national highway) डिवीजन के अंतर्गत हो रहा है। हमनें ग्राम पंचायत छतौना और परसापानी जाते वक्त इस नेशनल हाइवे के बनने की बारीकियों पर ध्यान दिया। नेशनल हाइवे बनने के दौरान यात्री सुविधाओं को लेकर भी हर पहलुओं की जांच की गई। ज्यादातर हमनें ये पाया कि PWD के नेशनल हाइवे डिवीजन और ठेकेदारों का काम औसत दर्जे का है, यात्री सुविधाओं को लेकर निर्माण के दौरान कोई भी सावधानियां नहीं बरती जा रही हैं।
सुरक्षा से संबंधित कोई भी उपाय नहीं किये जा रहे हैं। हाइवे के निर्माण को लेकर हम आपको ज्यादा से ज्यादा वीडियो दिखाने की कोशिश कर रहे हैं , जिससे कि आम जनता को ये समझ में आ जाए कि इस हाइवे के निर्माण के दौरान PWD के अधिकारी और ठेकेदारों की क्या जिम्मेदारियां हैं।
रतनपुर से केवची , नेशनल हाइवे (45) के टेंडर की जानकारी….
Package no. 1 केवंची से कारीआम रोड
* 35.340 kms road
* Work order date : 15.07.2024
* Completion date : 18 months from work order
* Tender value : 197.070 crore
28.90% below
* Total cost : 140 crores
* Contractor/firm name: satya builders, shyam infra (kolkata)
package package no . 2
* कारीआम से रतनपुर सड़क मार्ग
लंबाई : 42.569 kms (package no.2)
* 2 lane road with paved shoulder.
* टेंडर राशि : 214.16 करोड़
20.10% below
* फाइनल टेंडर राशि : 171.12 करोड़
* फर्म जो काम कर रही है : M/S Shanti Engicom Pvt.Ltd , korba
Package 2 का टेंडर पेटी ठेके (sub-let) में ठेकेदार निशांत जैन को दिया गया है। ये पेटी ठेकेदारी का क्या रिवाज़ चल रहा है छत्तीसगढ़ में, संबंधित विभाग के अधिकारी ही जानते हैं।
नेशनल हाइवे बिलासपुर डिवीजन के अधिकारी
* रविंदर कुमार खामरा (EE)
* अतुल पैरवार (SDO)
* अश्विनी शर्मा (sub engineer)
आपको बता दें कि ये सड़क दो राज्यों मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। सड़क निर्माण हो जाने के पश्चात आम नागरिकों के लिए यातायात सुचारू रूप से संचालित हो सकेगा। यह सड़क मां महामाया देवी रतनपुर से मां नर्मदा नदी के उद्गम स्थल तक पहुंचने के लिए भी उपयुक्त मार्ग साबित होगा। यह टेंडर की राशि केंद्र सरकार ने आबंटित की है, और क्रियान्वयन एजेंसी छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का नेशनल हाइवे डिवीजन है।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले उपाय…..
* निर्माण स्थल पर उचित सुरक्षा संकेत एवं चेतावनी बोर्ड लगाना ताकि चालक और मजदूरों को संभावित खतरों से अवगत कराया जा सके।
* ब्लैक स्पॉट (जहां दुर्घटना अधिक होती है) की पहचान कर वहां क्रैश बैरियर, सड़क चौड़ीकरण और ज्यामितीय सुधार लागू करना चाहिए।
* सड़क निर्माण के समय गड्ढों, टूटे हुए डिवाइडरों और असुरक्षित जगहों की मरम्मत पर ज़ोर देना चाहिए ताकि सड़क पर दुर्घटना की संभावना कम हो।
* निर्माण स्थल पर ट्रैफिक मैनेजमेंट का सही प्रबंध करना ताकि वाहनों का परिचालन सुरक्षित रूप से हो सके।
अगर बात रतनपुर से छतौना नेशनल हाइवे के सेफ्टी फीचर की हो तो मौके में कोई भी सेफ्टी फीचर नज़र नहीं आता। किसी भी वक्त इस सड़क पर बड़ी दुर्घटना हो सकती है। पूरी सड़क में धूल उड़ने से वहां के रहवासी परेशान हैं। बीच-बीच में पड़ने वाले गांव के लोग कहते हैं पता नहीं ये जानलेवा रोड कब बनेगी। इस नेशनल हाइवे के निर्माण के लिए काफी बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई की गई हैं। बीच-बीच में पड़ने वाले छोटी पुलिया का निर्माण भी घटिया स्तर का दिखता है।

नेशनल हाइवे के निर्माण के दौरान अगर धूल बहुत उड़ती है, तो अधिकारियों और ठेकेदारों को कई सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि आस पास रहने वाले लोगों को परेशानी ना हो।
* निर्माण स्थल में नियमित पानी का छिड़काव करना चाहिए ताकि धूल का उड़ना कम किया जा सके।
* निर्माण सामग्रियों को कवर करके रखा जाना चाहिए, जिससे धूल उड़ने के अवसर कम हों।
* निर्माण के दौरान कर्मचारियों के लिए मास्क उपलब्ध करवाना चाहिए ताकि वे धूल से सुरक्षित रहें।
* स्थानीय निवासियों से संवाद बनाकर उनकी शिकायतों को तुरंत सुनना और समाधान करना चाहिए।
* पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ के मानकों का पालन करना अनिवार्य है, और संबंधित पर्यावरण विभाग की गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य है।
इन सावधानियों के अपनाने से धूल के कारण होने वाली असुविधा घटाई जा सकती है, लेकिन रतनपुर से केवची नेशनल हाइवे में यह सब गाइडलाइंस किनारे कर दी गई हैं और आम जनता के स्वास्थ के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है।
नेशनल हाइवे बनने के दौरान संबंधित मंत्रालय और अधिकारियों की जिम्मेदारियां….
* भारत में नेशनल हाइवे निर्माण के दौरान अधिकारियों की मुख्य भूमिका परियोजना योजना, निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध प्रबंधन की होती है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि निर्माण कार्य सही मानकों और अनुबंध (agreement) शर्तों के अनुरूप हो। इस दौरान अधिकारी निर्माण स्थल का निरीक्षण करते हैं, कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हैं, और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करते हैं।
* यदि किसी नेशनल हाइवे के किसी सेक्शन पर एक वर्ष में बार-बार दुर्घटनाएं होती है, तो संबंधित मंत्रालय द्वारा ठेकेदार के साथ-साथ प्रोजेक्ट के निगरानी अधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाती है। इस जवाबदेही के तहत दंडात्मक कार्यवाही संभव है, जैसे जुर्माना लगाना, कार्य सुधारना आदि।
इस तरह, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में अधिकारी न केवल परियोजना प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि उनकी जवाबदेही का निर्धारण मॉनिटरिंग, निरीक्षण और सरकारी अनुबंध नियमों के माध्यम से पुख्ता किया जाता है। इस पूरी व्यवस्था से नेशनल हाइवे की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों बेहतर होती है।
इस तरह, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में अधिकारी न केवल परियोजना प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि उनकी जवाबदेही का निर्धारण मॉनिटरिंग, निरीक्षण और सरकारी अनुबंध नियमों के माध्यम से पुख्ता किया जाता है। इस पूरी व्यवस्था से नेशनल हाइवे की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों बेहतर होती है।
जिस योजना के आगे “प्रधानमंत्री” शब्द का अगर उपयोग हो रहा है, और वो योजना की हालत बद से बदतर है, तो उसे आप क्या कहेंगे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। इस योजना के तहत आने वाली सड़क की इन वीडियो से आप अंदाज़ा लगा सकते है कि पंचायतों में किस कदर भ्रष्टाचार फैला हुआ है…. देखिए..
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