RTI से जुड़े कुछ नियम एवं प्रावधान ।।।
बिलासपुर : (छत्तीसगढ़) सूचना का अधिकार भारत में एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के नाम से जाना जाता है। यह कानून प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों को अधिकार देता है। इसके तहत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से किसी भी प्रकार की सूचना मांग सकता है, बशर्ते यह सूचना किसी दस्तावेज या रिकॉर्ड में दर्ज हो।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत भारत के प्रत्येक नागरिक को सरकारी विभागों से किसी भी प्रकार की सूचना मांगने का अधिकार मिलता है। इसके अंतर्गत नागरिक, सरकार के निर्णय, योजनाओं, व्यय, रिकॉर्ड्स आदि की जानकारी मांग सकते हैं। यदि मांगी गई सूचना राष्ट्रिय सुरक्षा, संप्रभुता या व्यक्तिगत गोपनीयता से जुड़ी हो तो इसमें छूट दी जाती है। यह कानून भ्रष्टाचार को रोकने, प्रशासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने, और लोकतंत्र में जनभागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।वर्तमान में सूचना के अधिकार कानून को लागू करने वाले अधिकारी ही इस कानून को कमज़ोर और पंगु बना रहे हैं। अभी हाल ही में इसका उदाहरण हमें देखने को मिला।

छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत समग्र शिक्षा योजना के कार्यालय में आवेदक ने , विशेष स्कूली बच्चों के लिए प्रदेश स्तरीय खेल के आयोजन (2025) की जानकारी मांगी थी। जानकारी देने के एवज में आवेदक ने जिला मिशन समन्वयक अखिलेश तिवारी को प्रति पेज का भुगतान नकद राशि के रूप में दी, तो तिवारी ने नकद लेने से साफ मना कर दिया।
समग्र शिक्षा योजना कार्यालय ने जवाब देते हुए कहा कि, दस्तावेज़ देने के एवज में वो आवेदक से नकद नहीं लेंगे और रसीद भी नहीं देंगे। समग्र शिक्षा कार्यालय में बैठे समन्वयक अखिलेश तिवारी ने आवेदक को बोला कि ये “बनिए की दुकान है क्या “ , और नकद लेने से साफ मना कर दिया। ये पूरी घटना का मामला abc newz तक पहुंचा। आवेदक के साथ हमनें समग्र शिक्षा कार्यालय में बैठे मुख्य लेखापाल ( accountant ) से इस विषय के बारे में पूछा, तो सुनिए उन्होंने क्या कहा….
समग्र शिक्षा कार्यालय बिलासपुर में हो रही अनियमितता के अलावा हमारे पास एक और मामला आया। मस्तूरी के पी. एम. श्री. सेजेस (स्वामी आत्मानंद स्कूल) के टीचर संजय पांडे ने अपने ही स्कूल के प्रिंसिपल के कार्यालय में उनके अवकाश में चले जाने के मामले में आवेदन लगाया था। आवेदक टीचर संजय पांडे को एक पेज की जानकारी देने हेतु 2 रुपए जमा करने को कहा गया था, जो कि जमा कर दी गई। इसके बावजूद मस्तूरी स्कूल के प्रिंसिपल ने संजय पांडे को कोई जवाब और दस्तावेज नहीं दिया। मस्तूरी आत्मानंद स्कूल के टीचर संजय पांडे ने बताया कि उनके आवेदन की जानकारी आज 60 दिनों के बाद भी नहीं दी गई है। टीचर संजय पांडे ने स्कूल में लगातार हो रही अनियमितताओं के ऊपर भी प्रकाश डाला। प्रिंसिपल का गैरजिम्मेदाराना रवैया अभी भी जारी है। आप समझ सकते हैं कि बिलासपुर के स्कूल शिक्षा विभाग में चल क्या रहा है। कैसे सूचना के अधिकार कानून के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

भारत में सूचना के अधिकार कानून (2005) के तहत नकद भुगतान का नियम ….
* धारा 6 (section 6) : आवेदक सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन दे सकता है और इसके साथ निर्धारित शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है।
* सूचना का अधिकार (शुल्क और लागत का विनियमन) नियम,2005 के तहत rule 3 और rule 4 में पूरी प्रक्रिया दी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि शुल्क नकद, डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर या पोस्टल ऑर्डर के रूप में जमा किया जा सकता है और नकद भुगतान की स्थिति में रसीद देना अनिवार्य है।
* नियम 3 : आवेदन शुल्क कुल 10 ₹ रूपए है, जो लोक प्राधिकरण (संबंधित दफ्तर) को नकद जमा किया जा सकता है, और इसके बदले उचित रसीद अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए।
* नियम 4 : अतिरिक्त सूचना शुल्क (प्रति पन्ना या अन्य जैसे CD, floppy) की अदायगी भी नकद, डिमांड ड्राफ्ट या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से की जा सकती है तथा रसीद दी जाती है।
आपको बता दें कि यह प्रावधान पूरे भारत में सभी केंद्रीय और राज्य लोक सूचना अधिकारियों के लिए लागू है , सिवाय कुछ विशिष्ट क्षेत्रों या अपवादों के।
आवेदन शुल्क 10 रुपए नहीं लिए जाने पर कहाँ शिकायत करें…..
* सबसे पहले, शिकायत संबंधित विभाग के वरिष्ठ जन सूचना अधिकारी या विभाग के विभागाध्यक्ष को लिखित रूप में कर सकते हैं।
* यदि विभाग में शिकायत का समाधान न हो, तो राज्य सूचना आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग में शिकायत या अपील दर्ज़ कर सकते हैं।
* केंद्रीय लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली ( CPGRAMS ) पोर्टल पर शिकायत ऑनलाइन दर्ज़ करा सकते हैं, जो संबंधित लोक शिकायत अधिकारी को भेज दी जाती है।
* इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग या संबंधित राज्य सरकार के लोक शिकायत प्रकोष्ठ में भी भेजा जा सकता है।

बिलासपुर जिले के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत समग्र शिक्षा कार्यालय में आवेदकों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, आवेदन शुल्क और प्रति पृष्ठ नकद शुल्क लेने के नाम पर आवेदकों से बदतमीजी की जा रही है, जानबूझकर जानकारी देने में बाधा डाली जा रही है, जिससे आम आदमी का अधिकार प्रभावित हो रहा है।
सरकारी अधिकारियों के लिए यह आवश्यक है कि वे सूचना देने के दौरान सम्मानजनक और सभ्य व्यवहार करें। यदि आवेदनकर्ता से कोई अधिकारी बदतमीजी करता है, तो आवेदनकर्ता की शिकायत के आधार पर संबंधित विभाग या लोक सूचना आयोग अनुशासनात्मक जांच कर सकता है। अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही या अनुचित व्यवहार करता है, तो उस पर सरकारी सेवा नियमों के तहत चेतावनी, निलंबन या अन्य सेवा संबंधित दंड शामिल हो सकते हैं।
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