( कोटा विधानसभा में हो रहे भ्रष्टाचार का मामला )
बिलासपुर : ( छत्तीसगढ़) शिक्षा किसी भी राष्ट्र के विकास की नींव होती है और भारत जैसे विविधतापूर्ण और तेजी से बढ़ती हुई आबादी वाले देश में इसकी गुणवत्ता का अहम योगदान होता है। हाल के वर्षों में भारत की शिक्षा प्रणाली में कई सुधार हुए हैं, लेकिन गुणवत्ता के मामले में चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
भारत सरकार द्वारा जारी UDISE+ 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में वृद्धि हुई है। अब लगभग 93.3% स्कूलों में बिजली, 97 % से अधिक स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए शौचालय और 63.5% स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है। साथ ही शिक्षकों की संख्या भी बढ़कर 1 करोड़ से ऊपर हो गई है, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है।
लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास जब abc newz से बात करते हैं तो नजारा कुछ और ही देखने को मिलता है। बिलासपुर जिले के रतनपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत छतौना और परसापानी की सड़कों के बारे में हमनें प्रकाश डाला था। इसी कड़ी में आज हम निलेश बिस्वास से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूल, पंचायत भवन और तमाम सुविधाओं को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधि और समाजसेवकों की बात साझा करेंगे।
वैसे तो प्राथमिकताओं में शासन के हर विभाग की बात होनी चाहिए, लेकिन शिक्षा को अगर प्रथम पायदान में रखा जाए तो न्यायोचित होगा। सबसे पहले हमनें ग्राम पंचायत परसापानी के अत्यंत जर्जर हो चुके प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल के बारे में निलेश बिस्वास से चर्चा की…. बिस्वास ने क्या कहा, देखिए…..
कोटा विधानसभा का राजनीतिक समीकरण..
कोटा विधानसभा के विधायकों की सूची ( 1951 से अब तक )
* कांशीराम तिवारी (कांग्रेस) , 1951,1957
* सूरज कुंवर (कांग्रेस) , 1957 (द्वि-सदस्यीय प्रणाली)
* लाल चंद्रशेखर सिंह ( कांग्रेस) , 1962
* मथुरा प्रसाद दुबे (कांग्रेस) , 4 बार विधायक
* राजेंद्र प्रसाद शुक्ल (कांग्रेस) , 5 बार विधायक
* डॉक्टर रेणु जोगी, (कांग्रेस) , 3 बार विधायक
* डॉक्टर रेणु जोगी,( जे.सी.सी.जे ), 2018
* अटल श्रीवास्तव, (कांग्रेस) , 2023 से…..
इसका मतलब कोटा विधानसभा में 67 सालों से कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं, बावजूद इसके ग्राम पंचायतों का विकास नही होना बहुत ही शर्मनाक मामला है।
परसापानी पंचायत के स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनाने की व्यवस्था और स्कूली बच्चों को परोसने के इंतजाम की खामियां हमारी इन तस्वीरों से आप समझ सकते हैं । हम लगातार आपको स्कूल के हर कोने की तस्वीर दिखा रहे हैं , ताकि ये समझ में आ जाए कि स्कूलों के उद्धार के लिए करोड़ों रुपए किसकी जेब में जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना ( मिड डे मील/ पी .एम .पोषण योजना ) का मुख्य उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, जिससे उनके पोषण में सुधार हो और उन्हें कुपोषण से बचाया जा सके। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्थानीय स्तर पर भोजन पकाने के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना भी इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।

परसापानी ग्राम पंचायत के युवा सरपंच मनीलाल से हमने गांव की समस्याओं के बारे में पूछा, मनीलाल ने विस्तार से abc newz को क्या बताया देखिए…..
abc newz से बातचीत में परसापानी पंचायत के उपसरपंच शायद पहली बार मीडिया के कैमरे के सामने आए हैं, उन्होंने गांव की हर समस्या के बारे में खुलकर बात की……
कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत छतौना और परसापानी की तमाम समस्याओं को लेकर गांव के सामाजिक कार्यकर्ता से बातचीत में क्या-क्या बातें सामने आईं, देखिए……
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि परसापानी पंचायत के स्कूल में महिला टीचर के लिए शौचालय की व्यवस्था ही नहीं है। इससे आप अंदाजा लगाइए कि महिलाएं यहां कितनी सुरक्षित हैं और नेताओं और अधिकारियों के भाषणों में महिला सशक्तिकरण की बात होती है, ये अपने आप में बेहद ही शर्मनाक बात है।
छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे निचली इकाई है, जिनका उद्देश्य गांवों में योजनाओं का सही क्रियान्वयन और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है। लेकिन वर्तमान में इन पंचायतों के लगभग प्रत्येक विभाग में भ्रष्टाचार जड़ पकड़ चुका है। कई बार विकास के नाम पर सिर्फ कागज़ी कार्यवाही ही दिखा दी जाती है, जबकि वास्तविक धरातल में सब शून्य ही शून्य दिखता है। समय-समय पर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, नल जल आदि योजनाओं में घोटाले सामने आते रहते है।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर आदिवासी और पर्वतीय इलाकों में, सरकारी स्कूलों, आदिवासी छात्रावास की दयनीय स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाती है। जब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सतत निगरानी तथा बजट का पारदर्शी उपयोग नहीं होगा, तब तक स्कूलों की यह जर्जर दशा नहीं सुधर सकती। शिक्षा के मूलभूत अधिकार को बचाने के लिए नेताओं और अधिकारियों को अपनी नीयत ठीक करके पारदर्शी और जिम्मेदार होना पड़ेगा, स्कूली बच्चों के प्रति संवेदनशील होकर शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करवाना होगा।
बहरहाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास ने पंचायत की जनता से कहा है कि समस्याओं के मामले में वो अधिकारियों से बात करेंगे, उनको अंतिम चेतावनी दी जाएगी, तत्पश्चात अगर उग्र आंदोलन भी करना पड़ेगा तो उनकी पार्टी पीछे नहीं हटेगी, जिसकी पूरी जवाबदारी प्रशासन की होगी।
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