बिलासपुर : (छत्तीसगढ़) देश में पिछले कुछ सालों से लगातार हो रहीं रेल दुर्घटनाएं चिंता का विषय बनीं हुईं हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर में 4 नवंबर 2025 को एक भयंकर रेल हादसा हुआ जिसमें मेमू पैसेंजर ट्रेन ( गेवरा रोड बिलासपुर मेमू लोकल ) और खड़ी मालगाड़ी के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में 11 यात्रियों की मौत हो गई और करीब 20 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि इस हादसे का मुख्य कारण मेमू ट्रेन द्वारा सिग्नल उल्लंघन (signal overshoot) था , जिससे ट्रेन ने लाल सिग्नल को नजरअंदाज किया और खड़ी मालगाड़ी के पिछले डिब्बे से मेमू ट्रेन टकरा गई। इस टक्कर में ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और मलबे में कई यात्री फंस गए, जिन्हें बचाव दल ने आठ से दस घंटे की कड़ी मेहनत के बाद निकाला। इस दुर्घटना में ट्रेन का लोको पायलट भी मृतकों में शामिल है।
आपको बता दें कि रेल दुर्घटना बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले लालखदान एरिया की है। ये इलाका बिलासपुर रेलवे जोन के मुख्यालय बिलासपुर के काफी करीब है।
रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 10 से 15 लाख रुपए की मुआवजा राशि और घायलों को वित्तीय मदद देने की घोषणा की है। दुर्घटना के बाद रेलवे ने उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं और साथ ही साथ दुर्घटना के कारणों की पूरी तहकीकात चल रही है।
भारत में रेल दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य रूप से ये विभाग जिम्मेदार होते हैं…..
1 .रेलवे सुरक्षा आयोग (commissioner of railway safety CRS)
यह आयोग रेल दुर्घटना की जाँच करता है और दुर्घटना के कारणों का पता लगता है। CRS नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन होता है ताकि रेलवे से स्वतंत्र होकर जांच कर सके। यह सुरक्षा उपायों की सिफारिश भी करता है।
2 . सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन विभाग
अधिकतर गंभीर दुर्घटनाओं की जाँच में सिग्नलिंग फेल्योर (गलत या खराब सिग्नलिंग) पाया जाता है। सिग्नलिंग विभाग को सिग्नल सिस्टम , मरम्मत, रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी होती है। कई बार तकनीकी खामियों और इंसानी चूक से दुर्घटनाएं होती हैं।
3. ऑपरेशंस (operations deptt.) विभाग
ट्रेन के संचालन , ट्रैक पर ट्रेनों के समय और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी यह विभाग निभाता है। इसमें लोको पायलट (ड्राइवर) , स्टेशन मास्टर और ट्रैफिक कंट्रोल शामिल है। इस विभाग की गलती से भी ट्रेन दुर्घटना हो सकती है।
4. इंजीनियरिंग विभाग
ट्रैक, पुल, स्टेशन के ढांचे की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी इस विभाग की है। ट्रैक की खराबी और पुलों की कमजोर स्थिति भी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं।
5. मैकेनिकल विभाग
इंजन, कोच और ब्रेकिंग सिस्टम की मरम्मत तथा तकनीकी स्थिति की देखरेख ये विभाग करता है। कोई मैकेनिकल फेल्योर दुर्घटना का मुख्य कारण हो सकता है।
6. मानव संसाधन और प्रशिक्षण विभाग
ट्रेन कर्मचारियों और ऑपरेटरों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उनके नियमों का पालन इस विभाग की जिम्मेदारी है। अशिक्षित या अनभिज्ञ स्टाफ से भी दुर्घटना घट सकती है।
7. प्रशासनिक विभाग (administration deptt.)
रेलवे बोर्ड और सेफ्टी कमिशनरेट की जिम्मेदारी रेलवे की सुरक्षा नीति बनाना, उसे लागू करना और निरीक्षण करना होता है। सुरक्षा मानकों को सही से पालन करवाना इनके दायरे में आता है।
इसका मतलब ये हुआ कि रेलवे से संबंधित कोई भी दुर्घटना के पीछे सीधे ये सब विभाग जिम्मेदार होते हैं। बिलासपुर जोन के अंतर्गत आने वाले बिलासपुर मंडल के अंदर रेल दुर्घटना के पीछे विभागों के जिम्मेदार अफसरों की सूची इस प्रकार है…..
Tarun Prakash (General Manager)
Vijay kumar sahu ( addl. General Manager)
Sanjay Biswas ( pricipal chief mechanical engineer )
Govardhan Prasad Khutey ( principal chief signal and telecommunication engineer )
Rahul Agarwal ( principal chief operating manager )
Pradeep Kumar ( pricipal chief Safety Officer )
Rajmal Khoiwal ( DRM,bilaspur division )
ये सारे अधिकारी बिलासपुर रेलवे जोनल ऑफिस में पदस्थ हैं, बिलासपुर DRM की जिम्मेदारी बिलासपुर डिवीजन के क्षेत्र की होती है। कायदे से तो रेल मंत्रालय को इन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करनी चाहिए, क्योंकि बिलासपुर रेल दुर्घटना के पीछे इन तमाम अधिकारियों की भी सीधे जिम्मेदारी है। अब देखना ये है कि रेल मंत्रालय बड़े अधिकारियों के ऊपर सीधी कार्यवाही करेगा कि हमेशा की तरह छोटे और निरीह कर्मचारियों के ऊपर गाज गिराएगा। भारत में रेल दुर्घटनाओं के मामले में शायद ही ये सुनने को मिला होगा कि PHOD ( head of department ) लेवल के अधिकारियों को सजा मिली होगी, छोटे मोटे कर्मचारियों की बलि ले ली जाती और बड़े अधिकारी साफ बच निकलते हैं।

मेमू लोकल ट्रेन की दुर्घटना के मामले में हादसे के वक्त से ही आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला संवेदनशील होकर घायलों से लगातार मिल रहीं है। प्रियंका ने बिलासपुर के CIMS ( सरकारी अस्पताल) हॉस्पिटल में घायलों को त्वरित उपचार दिलाने में काफी मदद कर रहीं हैं, गंभीर मरीजों को तत्काल बिलासपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल अपोलो में शिफ्ट भी करा रही हैं। प्रियंका डॉक्टरों से लगातार घायलों की हालत की अपडेट भी ले रहीं हैं। रेल दुर्घटना से संबंधित सिस्टम को आड़े हाथों लेते हुए प्रियंका ने abc newz के सवालों का जवाब दिया…. सुनिए प्रियंका क्या बोल रहीं हैं……
रेल दुर्घटना की जाँच में रेलवे विभाग नीचे दिए हुए मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देता है....
signalling system : सिग्नल की स्थिति और कार्यप्रणाली, सिग्नल उल्लंघन हुआ या नहीं।
Track Condition : ट्रैक का अलाइनमेंट, पटरी की स्थिति, टर्नआउट का मानक, ट्रैक पर किसी प्रकार की गड़बड़ी।
Braking System : ट्रेन के ब्रेक सही काम कर रहे थे या फेल हुई, ब्रेकिंग की तीव्रता। दुर्घटना के वक्त ट्रेन की गति निर्धारित सीमा के अनुरूप थी या अधिक।
Role of Loco Pilot and Crew : चालक दल के कार्यों , सावधानी और नियमों के पालन का आंकलन।
माल गाड़ी और यात्री ट्रेन की स्थिति : दोनों गाड़ियों के तकनीकी और परिचालन पहलुओं की जांच।
Human Error or Negligence : चालक या अन्य स्टाफ की किसी प्रकार की चूक।
Functioning of Safety Devices : ऑटोमैटिक ब्रेकिंग या कवच जैसे तकनीकी सुरक्षा उपकरणों की जांच।
हादसे के बाद की स्थिति : दुर्घटना स्थल का मुआयना, मृतकों और घायल यात्रियों की स्थिति।
रेलवे विभाग इन सभी मापदंडों की जाँच करके दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाता है, उसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाता है और भविष्य में दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाता है।
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव काफी समय से देश में हो रहीं रेल दुर्घटनाओं को रोकने का प्रयास कर रहे हैं । अश्विनी वैष्णव लगातार रेल सुरक्षा सुधारों, विशेषकर कवच (automatic train protection system) प्रणाली के विकास और तैनाती पर काम कर रहे हैं। कवच तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है और लोको पायलट की गलती या ब्रेक लगाने में असमर्थता के मामले में ट्रेन को अपने आप ब्रेक लगाकर दुर्घटना से बचाती है।
भारत की रेल व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी रेल नेटवर्कों में से एक है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री इस पर निर्भर रहते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में लगातार हो रही रेल दुर्घटनाएं देश की सुरक्षा व्यवस्था और रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक टेक्नोक्रेट मंत्री माने जाते हैं। अश्विनी IAS रह चुके हैं और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। उनसे अपेक्षा थी कि रेल सुरक्षा को आधुनिक तकनीक और प्रबंधन से लैस करेंगे, लेकिन लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं से उनकी साख को धब्बा लगा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को केवल हादसों के बाद बयान देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत की रेल व्यवस्था को सुरक्षित बनाना केवल अधिकारियों का नहीं, बल्कि मंत्री का नैतिक और राजनीतिक दायित्व भी है।
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