रायपुर : (छत्तीसगढ़) देश के तकरीबन ज्यादातर राज्यों में सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की नियुक्तियां कटघरे में हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सूचना के अधिकार कानून को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। इस कानून को कमजोर बनाने के लिए रिक्त पदों की नियुक्तियों में जानबूझकर भर्तियां नहीं की जा रहीं हैं। देश भर में राज्यों में नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगातार सुनवाई हो रही है। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश पारित किया है, जिसको हर राज्य को लागू करना है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के लिए क्या आदेश पारित किया है, देखिए…..
केंद्र सरकार में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्तियों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा…
केंद्रीय सूचना आयोग में नियुक्तियों के संबंध में हमें बताया गया है कि छानबीन समिति (search committee) ने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है, और छानबीन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, प्रधानमंत्री द्वारा नामांकित एक कैबिनेट मिनिस्टर को सम्मिलित किया गया है। ये समिति तीन हफ्तों के भीतर प्राप्त आवेदनों के आधार पर नियुक्तियां करेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई संदेह नहीं है कि केंद्र सरकार हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों (rti एक्विस्ट अंजलि भारद्वाज केस में) पर कार्यवाही करते हुए, उम्मीदवारों के चयन के कार्यों को शीघ्र ही पूर्ण कर लेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर निर्देश दिया है कि, बिलासपुर हाइकोर्ट को 4 सप्ताह के भीतर मामले का निपटारा करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बैंच (जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची) ने आदेश दिया कि, नियुक्ति प्रक्रियाओं पर लंबित रोक मामले को हाइकोर्ट जल्दी सुनवाई करके निस्तारण करे तथा सभी निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजे। यह निर्देश सरकारी याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए हैं, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया अदालती विवादों में फंसी हुई थी, और हाइकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी।
छत्तीसगढ़ राज्य के अधिवक्ता ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट द्वारा WPS no.377/2025 और उससे संबंधित प्रकरणों में अंतरिम आदेश पारित किए जाने के कारण, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का कार्य रुक गया है। अधिवक्ता ने कहा कि नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया की निगरानी हाइकोर्ट कर रहा है, हाइकोर्ट से अनुरोध है कि 4 हफ्ते के अंदर मामले का अंतरिम निराकरण कर ले।
छत्तीसगढ़ राज्य में सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में अभी तक क्या-क्या हुआ ।
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में गठित छानबीन समिति में ये मेंबर्स शामिल थे….
* मनोज कुमार पिंगुआ (अध्यक्ष) ,1994 batch IAS, अपर मुख्य सचिव
* श्रीमती निहारिका बारिक , 1997 batch IAS
* सोनमणि बोरा , 1999 batch IAS
* अविनाश चंपावत , 2003 batch IAS
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के सम्बन्ध में जारी ज्ञापन दिनांक..
5.09.2022
7.02.2024
29.112024
प्राप्त आवेदनों (कैंडिडेट चयन के लिए) की संख्या…
94 ,98 एवं 57
कुल प्राप्त आवेदन : 209
बैठक में निम्नलिखित प्राप्त आवेदनकर्ताओं को दिनांक 26.03.2025 में इंटरव्यू हेतु बुलाए जाने का निर्णय लिया गया। सूची इस प्रकार है…..


ऊपर दी हुई चयन सूची में कुछ नामों को हम आपसे उनके batch year के साथ साझा कर रहे हैं ….
Amitabh jain..1989 batch, IAS (retired chief secretary)
Ram Prasad Mandal…1987 batch, IAS (retired chief secretary)
Ashok Juneja..1989 batch, IPS ( retired DGP)
Sanjay Pillay..1988 batch, IPS (retired jail DGP)
Durgesh Madhav Awasthi..1986 batch IPS (retired DGP)
हम batch के हिसाब से सूची सार्वजनिक इसलिए कर रहे हैं , क्योंकि अगर छत्तीसगढ़ के 1994 , 1977 ,1999 और 2003 batch के अधिकारी अपने सीनियर अधिकारियों का मुख्य सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद का इंटरव्यू लेते हैं तो फिर इस राज्य का भगवान ही मालिक है। ये बड़े आश्चर्य और शर्म की बात है कि छानबीन समिति में बैठे अधिकारी काफी जूनियर होते हुए भी अपने सीनियर का इंटरव्यू लेते हैं। राज्य शासन भी इस पर आंखें मूंदे हुए है। छानबीन समिति का ऐसे तो औचित्य ही नहीं रह जाता है। छानबीन समिति में सचिव स्तर का अधिकारी अपने मुख्य सचिव का इंटरव्यू ले रहा है, इससे हास्यास्पद और क्या हो सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्यपाल रमेन डेका को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। राज्य शासन को इस छानबीन समिति को तुरंत भंग करके एक नई और पारदर्शी समिति बनानी चाहिए और उसमें काबिल अधिकारियों को रख कर मुख्य सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद पर काबिलियत के आधार पर नियुक्ति करना चाहिए।

सरकारें सूचना का अधिकार कानून को कैसे कमजोर करने के तरीके अपनाती है….
* मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में लम्बी देरी से आयोगों की कार्यक्षमता को प्रभावित किया जाता है।
* सरकारी विभाग और अधिकारी RTI के तहत मांगी गई जानकारी देने में बेवजह विलंब करते हैं, सूचनाओं को छुपाते हैं या अप्रमाणिक जवाब देते हैं।
* सूचना अधिकारियों के अपर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधनों के अभाव में अधिकारी RTI की सही प्रक्रिया नहीं निभा पाते, जिससे आवेदनकर्ता असंतुष्ट रह जाते हैं।
इन सभी कारणों से सूचना का अधिकार कानून का उद्देश्य कमजोर होता है और आम जनता को पारदर्शिता और जवाबदेही के लाभ नहीं मिल पाते। छत्तीसगढ़ राज्य में इस वक्त सूचना आयोग में नियुक्तियों के अभाव के कारण लगभग 35000 से ज्यादा मामले लंबित हैं। इससे ये साफ समझ में आता है कि सरकारें आम जनता के अधिकारों के प्रति जरा भी गंभीर नहीं है। सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और आयुक्तों की नियुक्तियां नहीं करना बहुत ही गंभीर मामला है। सूत्र बताते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में ज्यादातर कर्मचारी या तो संविदा में हैं या प्रतिनियुक्ति में हैं , ये भी अपने आप में गंभीर मामला है। सूचना आयोग में पूर्णकालिक भर्ती होनी चाहिए। राज्य सरकार को जल्द से जल्द इस मामले में निर्णय लेकर आम जनता के अधिकारों की रक्षा करना चाहिए , जो इनका फ़र्ज़ भी है।
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