बिलासपुर : (छत्तीसगढ़) वैसे तो छत्तीसगढ़ में PMGSY की सड़कों के मामले में बड़े–बड़े भ्रष्टाचार की खबरें आती रहतीं हैं , लेकिन बिलासपुर जिले के अधिकारियों का भ्रष्टाचार कुछ ज्यादा ही बड़ा दिखता है। बिलासपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी PMGSY के तहत बनने वाली डामर सड़कों पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपए की लागत से बनाई जा रही सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ रही हैं, गिट्टी बाहर आ रही है, डामर की परत का अता–पता नहीं है और कई जगहों में तो पूरी सड़क ही गायब है।
बिलासपुर जिले में PMGSY के तहत बनाई जा रही सड़कों में हो रहे भ्रष्टाचार से जुड़े कुछ प्रश्न उठ रहे हैं , तकनीकी मानकों के अनुसार बनने वाली सड़कें आखिर इतनी जल्दी खराब क्यों हो रहीं हैं ? क्या हर लेयर में भ्रष्टाचार हो रहा है ? क्या अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। ये सारे गंभीर सवाल हैं, जिससे बिलासपुर जिले का PMGSY कार्यालय संदेह के दायरे में है।
PMGSY की डामर रोड कैसे बनती है ?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सड़क निर्माण कई तकनीकी परतों में किया जाता है। हर परत की मोटाई, गुणवत्ता और मटेरियल का तय मानक होता है। मोटे तौर पर डामर की सड़कों की परतें इस प्रकार होती है….
* sub grade layer
* granular sub base
* wet mix macadam
* prime coat
* tack coat
* bituminus macadam
डामर की सड़कों में लगभग इतनी परतें होती ही हैं , परतों की मोटाई सड़क की कंडीशन को देखकर तय की जा सकतीं हैं। डामर सड़कों में हो रहे भ्रष्टाचार इन्हीं परतों में मटेरियल को ऊपर–नीचे करके किया जाता है।

कागज़ों में सड़क, जमीन पर गड्ढे !!
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली सड़कों के इंस्पेक्शन और आदिवासी बहुल गांव के निवासियों से बात करने के बाद ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की लंबाई और चौड़ाई को छोटा कर दिया गया है , सड़क के रास्ते में जितने पुलिया की संख्या टेंडर दस्तावेज़ में थी, उसकी मात्रा भी कम कर दी गई है , साइड ड्रेन नहीं बनाई गई है, माप पुस्तिका ( measurement book ) में फर्जी एंट्री की संभावनाएं हैं, गुणवत्ता जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क को देखकर ऐसा लगता है कि टेस्ट रिपोर्ट भी फर्जी बनाई जा रही होगी।

खासकर कोटा ब्लॉक के अंतर्गत बनने वाली सड़कों के मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश बिस्वास ने PMGSY के बिलासपुर कार्यालय में RTI लगाकर सड़कों के टेंडर दस्तावेज़ और SE वरुण सिंह राजपूत के प्रमोशन के दस्तावेज़ मांगे थे, लेकिन वरुण सिंह राजपूत ने दस्तावेज़ देने से इनकार कर दिया , इसका मतलब साफ है कि वरुण सिंह राजपूत भी सड़कों में हो रहे भ्रष्टाचार के मामले में संदेह के घेरे में हैं। निलेश बिस्वास ने abc newz को बताया कि सड़कों में हो रहे भ्रष्टाचार के मामले में PMGSY कार्यालय में पदस्थ जो भी अधिकारी शामिल है, उसकी जांच करवाई जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी। बिस्वास ने बताया कि ग्राम पंचायत परसापानी और बंगलाभाटा की सड़कों को लेकर हाइकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई है , हाइकोर्ट ने PWD सचिव को नोटिस दिया है और जवाब दाखिल करने को कहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल–कलेक्टर की जवाबदेही ?
आपको बता दें कि जिस जिले में सड़क बन रही है… उस जिले का कलेक्टर प्रशासन का मुखिया होता है। विकास कार्यों की निगरानी और शिकायतों पर कार्यवाही करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर लगातार शिकायतें आने के बावजूद कार्यवाही नहीं होती… अगर घटिया सड़क बनने के बाद भी भुगतान जारी रहता है… अगर जांच दबा दी जाती है… तो जनता सवाल उठाती है कि आखिर जिला प्रशासन क्या कर रहा था ?

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य गांवों को विकास से जोड़ना था… लेकिन अगर भ्रष्टाचार ही सड़क बन जाए, तो गांव तक विकास कैसे पहुंचेगा ? अब जरूरत है निष्पक्ष जांच की… जवाबदेही तय करने की और जनता के पैसे की सुरक्षा की, क्योंकि सड़क सिर्फ डामर नहीं होती, वो गांव की उम्मीद होती है।
abc newz को आप अब हमारे you tube और instagram में follow कर सकते हैं…abcnewz_india

