बिलासपुर :(छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट (चकरभाठा) को लेकर कई समस्याएं हैं, जिनमें मूलभूत सुविधाओं की कमी, नाइट लैंडिंग न होना, रनवे विस्तार में देरी और रक्षा मंत्रालय की ज़मीन हस्तांतरण का विवाद प्रमुख है। हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने, सभी महानगरों तक सीधी उड़ाने शुरू करने और अधर में लटकी हुई सुविधाओं के विकास की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चला रही है।

एयरपोर्ट की मुख्य समस्याएं…
* मूलभूत सुविधाएं जैसे वेटिंग एरिया, पार्किंग और यात्री सुविधाओं का अभाव , जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है।
* नाइट लैंडिंग सुविधा न शुरू होना और रनवे की लंबाई चौड़ाई बढ़ाने में देरी।
* रक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के पास 1012 एकड़ जमीन का हस्तांतरण पूरा न होना, हालांकि हाल ही में यह लौटा दी गई है, लेकिन भुगतान विवाद अटका हुआ है।
संघर्ष समिति के धरने प्रदर्शन…

संघर्ष समिति ने 2019 से धरना प्रदर्शन शुरू किया, जो अभी तक चल रहा है, जिसमें महाधरना, पदयात्रा, सर्वधर्म प्रार्थना सभा और ज्ञापन सौंपना शामिल है।
हवाई सुविधा संघर्ष समिति ने 10 दिसंबर 2025 को दिल्ली के जंतर मंतर पर दोपहर 2 बजे सांकेतिक धरना आयोजित किया। धरने के पहले प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, सांसद विवेक तनख़ा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, और सांसद ज्योत्सना महंत से मुलाकात कर मांगे रखीं।

हवाई सुविधा संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल ने एयरपोर्ट की सुविधाओं और विस्तार को लेकर केंद्र सरकार में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। समिति का कहना है कि मंत्री संजय सेठ ने इस मामले को तुरंत संज्ञान में लेते हुए अपने OSD/सचिव को तत्काल कार्यवाही के लिए निर्देशित किया। मंत्री ने समिति से कहा कि वो बिलासपुर शहर से अच्छी तरह से वाकिफ हैं, बिलासपुर बहुत ही खूबसूरत शहर है।

जंतर मंतर धरने में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू को भी ज्ञापन सौंपा। जंतर मंतर धरना सभा को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व महापौर रामशरण यादव और पूर्व सभापति शेख नजीरुद्दीन ने भी संबोधित किया। धरने में शामिल प्रमुख रूप से रामशरण यादव, सुदीप श्रीवास्तव, अशोक भंडारी , बद्री यादव, समीर अहमद, मनोज श्रीवास, विजय वर्मा, गोपी राव, नरेंद्र बोलर राजेंद्र शुक्ला आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

4C श्रेणी का क्या मतलब है, क्यों जरूरी है ?
* किसी भी राज्य में बड़े और नियमित हवाई जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 4C श्रेणी का एयरपोर्ट मानक माना जाता है। यह श्रेणी अंतरराष्ट्रीय मानकों (ICAO कोड) के अनुसार रनवे की लंबाई, चौड़ाई, सुरक्षा और सुविधाओं का न्यूनतम स्तर तय करती है।
* 4C श्रेणी के हवाई अड्डे से मेट्रो शहरों और प्रमुख राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए सामान्य कमर्शियल जेट विमानों की उड़ाने संचालित की जा सकती हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ती है।
* 4C मानक के अनुसार रनवे मजबूत, पर्याप्त लंबा और चौड़ा होता है, जिससे सुरक्षा, लोडिंग क्षमता और खराब मौसम में ऑपरेशन की विश्वशनीयता बनी रहती है।
जिम्मेदारी किसकी ??
इस देरी के लिए स्थानीय सांसद, विधायक, जिला प्रशासन के अधिकारी और राज्य सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग के पदाधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति पिछले 6 वर्षों से लगातार जनता के हित के लिए संघर्ष कर रही है, बावजूद इसके छत्तीसगढ़ के नेता और अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं , जो बहुत ही शर्मनाक और अमानवीय है।
राज्य स्तर पर एयरपोर्ट विकास में 6 साल की देरी के गंभीर परिणाम….
भारत जैसे विकासशील देश में एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना में 6 साल की देरी आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक रूप से विनाशकारी साबित हो सकती है। ये देरी न केवल सरकारी निवेश को व्यर्थ करती है, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी पटरी से उतार देती है, जिससे गंभीर परिणाम सामने आते हैं। प्रोजेक्ट को देरी से चालू करने से परियोजना की लागत 2=3 गुना बढ़ सकती है जिससे केंद्र और राज्य सरकारों पर करोड़ों रुपयों का बोझ पड़ता है।
प्रोजेक्ट की देरी करने पर निवेशक और कंपनियां इंतेज़ार नहीं करतीं, वे अन्य राज्यों में अपना कारोबार शिफ्ट कर लेती हैं। एयरपोर्ट से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार प्रभावित होते हैं, बेरोजगारी बढ़ती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था ठप्प हो जाती है।
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